4 दावेदारों में घोड़े ने खुद चुन लिया अपना मालिक

रांची : आपने अकबर-बीरबल की कहानियां पढ़ी होंगी। इनमें एक थी राजा चंद्रवर्मा की कहानी… राजा ने जिस लंगड़े भिखारी की मदद की, उसी ने राजा के घोड़े पर दावा कर दिया। घोड़े के दो दावेदारों का मामला बीरबल ने चालाकी से सुलझा दिया था। इस कहानी में दो दावेदार थे। ऐसा ही एक मामला गढ़वा जिले के डंडई में सामने आया। यहां एक घोड़े पर चार लोगों ने दावा ठोक दिया था। इस विवाद को सुलझाने के लिए गांव में पंचायत हुई। पंचों के सामने घोड़े ने खुद अपना मालिक चुन लिया।

दो महीने पहले जंगल में भटके घोड़े को घर ले आया

गढ़वा के डंडई प्रखंड के सूअरजंघा गांव निवासी मंगल भुइयां को दो महीने पहले जंगल में एक घोड़ा मिला। वह कहीं से भटक कर आ गया था। मंगल उसे पकड़ कर अपने घर ले आया। उसने गांव के लोगों को बताया कि घोड़ा खरीदकर लाया है। ग्रामीणों ने भी उसकी बात मान ली। मंगल ने घोड़े को नया नाम दिया-तूफान…। इसके बाद वह अच्छे ढंग से उसकी देखभाल करने लगा।

दो अजनबियों ने घोड़े पर जताया दावा, ग्रामीणों ने बनाया बंधक

एक दिन दो अजनबी सूअरजंघा गांव पहुंचे। दोनों ने अपना नाम अमानत अंसारी और सदीक अंसारी बताया। खुद को मेराल का कारोबारी बताते हुए घोड़े पर दावा किया। कहा-हमलोग घोड़े के व्यापारी हैं। पता चला कि एक घोड़ा इस गांव में आ गया है। मंगल भुइयां ने उनका विरोध किया और उन्हें बंधक बना लिया। हंगामे के बीच पचौर गांव से एक और दावेदार पहुंच गया। उसने अपना नाम प्रह्लाद साव बताते हुए खुद को घोड़े का असली मालिक बताया।

असली मालिक को देखते ही लिपटने लगा घोड़ा

घोड़ा एक और दावेदार चार हो गए। बात बिगड़ती देख मुखिया अजय सिंह को बुलाया गया। पंचायत बैठी। पंचों ने घोड़े को दूर बांध दिया और पहले दावेदार मंगल को घोड़े के पास भेजा। फिर दोनों सौदागर गए। अंत में प्रह्लाद साव गया। प्रह्लाद को देखते ही घोड़ा उनसे लिपटने लगा। घोड़े का व्यवहार देखकर पंचों ने जान लिया था कि असली मालिक कौन है। फिर घोड़ा प्रह्लाद को सौंप दिया। मंगल को झूठ बोलने के लिए डांट मिली। दोनों सौदागरों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया कि दोबारा ऐसी गलती न करे।

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