मुंबईकरों पर एक और मार

मुंबई : कोरोना महामारी से पहले से परेशान मुंबईकरों पर महंगाई की भी मार पड़ी है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों का सिलसिला तो जारी था ही, इसी बीच मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराये बढ़ा दिए गए हैं। इनके यात्रियों की जेब पर अब बोझ बढ़ेगा। यूनियन की मांग पर राज्य परिवहन मंत्रालय ने मोहर लगा दी है। एक मार्च से काली-पीली टैक्सी और ऑटो की सवारी करने के लिए मीटर डाउन होते ही 3 रुपये ज्यादा किराया देना होगा। ऑटो का शुरुआती किराया 18 से बढ़ाकर 21 रुपये और टैक्सी का 22 से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिया गया है।

ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किरायों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए सोमवार को बैठक हुई। यूनियन द्वारा पहले किराया वृद्धि का प्रस्ताव भेजा गया था। उसके बाद कई बार बैठकें की गई थीं। किराया वृद्धि का फैसला मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी द्वारा किया गया। प्रस्ताव में ऑटो का न्यूनतम किराया 21 और टैक्सी का न्यूनतम किराया 25 रुपये करने की मांग की गई थी। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में लगातार वृद्धि होने के बाद यूनियन ने कई बार किराये बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था।

यूनियन का कहना है कि मुंबई में पिछली बार किराया वृद्धि 2015 में हुई थी। उस दौरान ऑटो का न्यूनतम किराया 15 से बढ़ाकर 18 रुपये और टैक्सी का किराया 18 से बढ़ाकर 22 रुपये किया गया था। पिछले पांच साल में कई बार ईंधन के दामों में वृद्धि हुई, लेकिन किराया बढ़ोतरी का फैसला नहीं किया गया। लॉकडाउन के दौरान कई ऑटो-टैक्सी चालकों की आजीविका बुरी तरह से प्रभावित हुई थी। उसके बाद ही मुंबई ऑटो टैक्सीमेंस यूनियन के नेता शशांक राव की ओर से किराया बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया था।

खटूआ कमिटी की रिपोर्ट पर
मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराया की वृद्धि को लेकर कोर्ट के निर्देश के बाद खटूआ कमिटी का गठन किया गया था। MMRTA द्वारा जो किराया वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसका आधार खटूआ कमिटी की रिपोर्ट है। न्यूनतम किराया शुरू होने के बाद प्रति किमी कितना किराया जोड़ना है, इसे कमिटी की रिपोर्ट में दिया गया है।

पैकेज पर नहीं हुआ विचार
टैक्सीमेंस यूनियन के नेता ए.एल. कोड्रोस ने भी लंबे समय से टैक्सी किराये में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा था, जिसकी अब सुनवाई हुई है। उनके अनुसार महामारी के दौरान टैक्सी वाहन चालकों को भारी नुकसान हुआ है। वाहनों की ईएमआई देने के लिए पैसे नहीं थे। यूनियन लीडर शशांक राव ने भी ऑटो ड्राइवरों को प्रतिमाह दस हजार रुपये राहत पैकेज देने का प्रस्ताव रखा था, जिस पर कोई फैसला नहीं किया गया है।

1 मार्च से नए किराये होंगे लागू

ऑटो-टैक्सी के किराये पांच साल से नहीं बढ़े थे। ऐसे में यह फैसला कोई बड़ी बात नहीं है। लॉकडाउन में रिक्शा चालकों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई सरकार को करनी चाहिए। खासतौर से गाड़ी के लिए गए कर्ज को ब्याज समेत माफ करना चाहिए।
शशांक राव, यूनियन लीडर

नई किराया वृद्धि 1 मार्च से लागू होगी और अगले तीन महीने तक ऑटो और टैक्सी वाले मीटर को रीकेलीबर (नए किराए के लिए) करा सकते हैं। जिस गाड़ी का मीटर रीकेलीबर नहीं होगा, वह बढ़ा हुआ किराया नहीं ले सकेगा।
– अनिल परब, परिवहन मंत्री

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