औरंगाबाद के किसान को 9 एकड़ जमीन के बदले मिला 23 करोड़ रुपये का मुआवजा

  • महाराष्ट्र सरकार के प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन दान करने पर औरंगाबाद के एक किसान परिवार को सर्वाधिक मुआवजा मिला
  • मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए अपनी 9.5 एकड़ जमीन दान करने पर किसान परिवार को मिले 23.4 करोड़ रुपये
  • अधिकारियों का कहना है कि यह भारत का सबसे तेज भूमि अधिग्रहण है जो डेढ़ साल में पूरा हो गया, अगले साल शुरू होगा हाइवे

औरंगाबाद/मुंबई : औरंगाबाद के तुलजापुर गांव के यानेश्वर दिगंबर कोटले 12 मार्च 2018 का वह समय याद करते हैं जब उनके पिता के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए जाने का मेसेज आया। कोटले परिवार के लिए वह दिन यादगार था। उन्हें राज्य सरकार की तरफ से एक प्रोजेक्ट के लिए सर्वाधिक करीब 23.4 करोड़ रुपये का भुगतान मिला था। दरअसल कोटले परिवार ने मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेसवे के लिए अपनी 16 एकड़ पैतृक जमीन से 9.5 एकड़ हिस्सा दान किया था।

सरकारी कर्मचारी यानेश्वर (37) कहते हैं, ‘खेती से हमारी हर साल 3 से 5 लाख रुपये तक की आय हो जाती थी। हमारा परिवार का जमीन का भावनात्मक जुड़ाव था लेकिन जब हमने इसके बदले ऑफर किए जाने वाले मुआवजे को गिनना शुरू किया तो हमारा मन बदल गया।’

पहले किसानों ने जमीन अधिग्रहण का किया था विरोध
2016-17 में जब दो शहरों के बीच 701 किमी लंबी सड़क परियोजना शुरू हुई तो 10 जिलों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। हजारों किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध किया और नासिक और औरंगाबाद जिले के कई इलाकों में अधिकारियों का विरोध किया था। उस वक्त प्रदर्शनकारियों ने समृद्धि मुर्दाबाद का नारा लगाया था।

मुआवजे का दाम 5 गुना बढ़ाने पर खत्म हुआ प्रदर्शन
हालांकि बाद में सरकार ने भूमि अधिग्रहण पॉलिसी में बदलाव कर उसकी कीमत बाजार दाम से 5 गुना बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद जाकर आंदोलन खत्म हुआ। एमएसआरडीसी के वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राधेश्याम मोपलवार ने बताया, ‘हम अब तक 34,000 परिवारों को 25,000 एकड़ जमीन के लिए 8,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं।’

प्रोजेक्ट की लागत 55,335 करोड़ रुपये

औरंगाबाद में एमएसआरडीसी के डेप्युटी कलेक्टर एचवी अरगुंडे ने बताया, ‘यह भारत का सबसे तेज भूमि अधिग्रहण है। यह डेढ़ साल में पूरा हो गया। उन्होंने बताया, इसमें जरा सी भी देरी से हमें एक साल में 5,600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान होता। किसानों को बड़ा मुआवजा देने का विकल्प अच्छा रहा।’ इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 55,335 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

अगले साल से शुरू हो जाएगा हाइवे
नागपुर से शिरडी तक 502 किमी लंबी सड़क का निर्माण अगले साल मई तक पूरा होने की संभावना है। पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगले साल मुंबई से नागपुर के लिए यह हाइवे तैयार हो जाएगा। इसको लेकर तेजी से काम हो रहा है। इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए करीब 28,000 से ज्यादा मजदूर लगाए गए हैं।

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