कांग्रेस की मधु नुवाल पहुंची नगर परिषद, 31 पार्षद साथ होने का दावा

दोनों दलों को अंदरखाने क्रॉस वोटिंग का डर भी सता रहा है। निर्दलीयों के साथ साथ कांग्रेस-भाजपा के असंतुष्ट भी किंगमेकर की भूमिका में हैं।

बूंदी नगर परिषद सभापति सहित पांच नगर पालिकाओं कापरेन, लाखेरी, इंदरगढ़, नैनवा व केपाटन के पालिकाध्यक्ष पद के लिए मतदान जारी है। सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना होगी। उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव 8 फरवरी को होगा।

बूंदी में नगर परिषद सभापति पद के लिए जोड़-तोड़ के बाद भी कांग्रेस-भाजपा को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। 60 पार्षदों वाली नगर परिषद में बहुमत के जादुई आंकड़े के लिए 31 पार्षदों की जरूरत है। कांग्रेस के पास अपने 28 और भाजपा के पास अपने 24 पार्षद हैं।

कांग्रेस की ओर से सभापति पद के लिए मधु नुवाल मैदान में है। मधु ने पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत गई। पति भगवान नुवाल बिजनेसमैन हैं वो तालेड़ा प्रधान भी रह चुके हैं। उनकी कांग्रेस राजनीति में अच्छी पकड़ है। हाडौती के दो मंत्रियों के करीबी हैं। मधु नुवाल की दावेदारी को लेकर अंदरखाने कुछ स्थानीय नेता असन्तोष जाहिर कर चुके हैं। हालांकि अब हाईकमान के निर्देश के बाद कांग्रेस एकजुट नजर आ रही है। फिर भी पार्टी नेताओं को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है।

ऐसा इसलिए भी कि 2015 के सभापित चुनाव में कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। बहुमत नहीं होने के बाद भी नगर परिषद में बीजेपी का सभापति बना था। हालांकि, इस बार नगर परिषद सभापति चुनाव में कांग्रेस बेहतर स्थिति में है। कांग्रेस 32 से 35 वोट का गणित लेकर चल रही है।

भाजपा की ओर से सभापति पद के लिए सरोज अग्रवाल चुनावी मैदान में हैं। सरोज ने भी पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ा और जीत गई। पति सुरेश अग्रवाल बिजनेसमैन हैं। वो भाजपा शहर अध्यक्ष रह चुके हैं, वर्तमान में जिला महामंत्री हैं। विधायक अशोक डोगरा के करीबी हैं। बूंदी में भाजपा के अलग-अलग धड़े हैं जो एक दूसरे को पटखनी देने का मौका नहीं चूकते। हाल ही में जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा की गुटबाजी खुलकर सामने आई थी।

बहुमत के बाद भी भाजपा अपना जिला प्रमुख नहीं बना पाई थी। भाजपा के एक गुट ने बगावत की ओर कांग्रेस के समर्थन से जिला प्रमुख की सीट हासिल की। नगर परिषद चुनाव में भी भीतरघात के कारण भाजपा 24 सीट पर ही सिमट गई। जीते हुए पार्षदों में कुछ पार्षद अलग गुट के हैं। ऐसे में भाजपा बैकफुट पर नजर आ रही है। उन्हें क्रॉस वोटिंग डर सता रहा है। लेकिन उम्मीद भी है कि कांग्रेस के असंतुष्ट पार्षद उनके पक्ष में मतदान कर सकते हैं। कुल मिलाकर दोनों दल फिलहाल आश्वस्त नहीं है। दोनों दलों को अंदरखाने क्रॉस वोटिंग का डर भी सता रहा है। निर्दलियों के साथ साथ कांग्रेस-भाजपा के असंतुष्ट भी किंगमेकर की भूमिका में हैं।

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