कोरोना का असर, 25 दिन के बजाय 15 दिन का 2 करोड़ 7 लाख में देगों का ठेका

अजमेर : सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 809वें उर्स में देगों के ठेके पर भी कोविड-19 का असर पड़ा है। पहली बार केवल उर्स के 15 दिन का ठेका किया गया है। हर साल उर्स के साथ ही पुष्कर मेले के लिए भी ठेका होता है। उर्स के 15 दिन का ठेका 2 करोड़ 7 लाख रुपए से अधिक की राशि का छूटा। अब पुष्कर मेले के लिए अलग से ठेका किया जाएगा।

अंजुमन सैयदजादगान और अंजुमन शेखजादगान की ओर से संयुक्त रूप से यह ठेका दिया जाता है। हर बार कुल 25 दिन का ठेका होता है, लेकिन इस बार 15 दिन का ही दिया गया है। अंजुमन सैयदजादगान के उर्स कन्वीनर सैयद मुसब्बिर हुसैन ने बताया कि कोविड-19 को देखते हुए ही ठेके को इस बार दो भागों में बांटा गया है। उर्स का ठेका अलग दिया गया है और पुष्कर मेले के ठेके को अलग कर दिया गया है। ठेका हाजी इफ्तेखार चिश्ती के नाम 2 करोड़ 7 लाख 7 हजार 786 रुपए में दिया गया है। यह ठेका 8 फरवरी को रात से शुरू होगा और 21 फरवरी तक रहेगा।

पिछले साल 25 दिन का ठेका 2.94 करोड़ का था
अंजुमन के सूत्रों के मुताबिक गरीब नवाज के 808वें उर्स में 25 दिनों का ठेका यानी उर्स के 15 दिन और पुष्कर मेला के 10 दिनों का ठेका 2 करोड़ 94 लाख रुपए में दिया गया था।

दरगाह में छोटी और बड़ी दो देग

दरगाह में छोटी और बड़ी दो देग है। बड़ी देग में 120 मण यानि 4800 किलो और छोटी देग 60 मण यानि 2400 किलो खाना मीठे चावल के रूप में पकाया जाता है और प्रसाद बांटा जाता है। इसमें केवल शाकाहारी भोजन ही पकाया जाता है। बताया जाता है कि मन्नत पूरी होने पर जायरीन देग पकाते हैं और इसके लिए बुकिंग की जाती है।

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