नवरात्रि में माता की चौकी इस तरीके से रखेंगे, तो मिलेगा लाभ

मां अम्बे तो अपने भक्तों के हर दुख का हरण करती हैं। जो कोई भक्त उनका सच्चे मन से स्मरण करता है, वह अपनी परेशानियों से मुक्ति पा जाता है। खासतौर से, नवरात्रि के ये नौ दिन माता की पूजा के लिए ही माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस भी घर में माता की अखंड ज्योति और कलश की स्थापना होती है, वहां पर माता स्वयं नौ दिनों के लिए वास करती हैं और अपने भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। अगर आप भी नवरात्रों में माता की कृपा के पात्र बनना चाहते हैं तो आपको कुछ विशेष उपाय करने चाहिए। आईए जानते हैं इन्हीं उपायों के बारे में-

वास्तुशास्त्र के अनुसार, हर देवी-देवता के लिए एक दिशा निर्धारित होती है। इसलिए जब आप किसी भी देवी-देवता का पूजन करें तो उस दिशा का खासतौर पर ख्याल रखें। माता दुर्गा के लिए पूर्व और दक्षिण अच्छी मानी जाती है। इसमें भी पूर्व की दिशा सर्वोत्तम होती है। इस दिशा को ज्ञान, बुद्धि और विवेक की दिशा माना जाता है। इसलिए जब आप माता की स्थापना करें तो उनकी स्थापना पूर्व दिशा में ही करें। इससे आपको अपनी पूजा का पूरा लाभ मिलेगा।

इसके अतिरिक्त जोत के लिए गाय के देसी घी का इस्तेमाल करना अच्छा माना जाता है। जब आप पूजा करते हैं तो आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। साथ ही आप माता की जोत की स्थापना कुछ इस तरह करें कि वह आपके राइट साइड पर हो। यह पूजा स्थान का अग्निकोण होता है। वहीं पूजा की अन्य सामग्री किसी भी दिशा में रखी जा सकती है। आमतौर पर वास्तुशास्त्र में यह नियम निर्धारित है कि अग्नि से संबंधित कोई भी सामग्री नार्थ-ईस्ट अर्थात ईशान कोण में नहीं रखनी चाहिए लेकिन माता की जोत के साथ यह नियम लागू नहीं होता क्योंकि माता की ज्योति की सकारात्मकता इतनी अधिक होती है कि अगर आप उसे ईशान कोण में रखते हैं तो उसकी सकारात्मकता न सिर्फ उस दिशा की बल्कि पूरे घर की नकारात्मकता को खत्म कर देती है।

नवरात्रि के दिनों में अगर आपके पास कोई स्फटिक या पीतल का श्रीयंत्र है तो उसे पूजा स्थल में अवश्य रखें। इससे आपके लिए धन लाभ के योग बनते हैं। आप यह श्रीयंत्र नवरात्रि के किसी भी दिन स्थापित कर सकते हैं। ध्यान रखें कि आजकल मार्केट में प्लास्टिक के श्रीयंत्र भी मिलते हैं, इन्हें भूलकर भी पूजाघर में न रखें। इससे आपको किसी प्रकार का लाभ प्राप्त नहीं होगा।

माता की चौकी के लिए लकड़ी या शुद्ध धातु जैसे चांदी या सोने का प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए कभी भी प्लास्टिक की चौकी का इस्तेमाल न करें। इसके अतिरिक्त आप अपने पूजा स्थान में मंगलदायक कलर जैसे लाल और पीले रंग का ही इस्तेमाल करें। मसलन, माता की चौकी में इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़े, पूजा के फल और फूल आदि में लाल और पीले रंग को ही महत्ता प्रदान करें। इस उपाय से घर में सकारात्मकता आती है। पीला रंग जहां ज्ञान, बुद्धि और विवेक के देवता सूर्य का प्रतीक है, वहीं लाल रंग शक्ति और मंगल को दर्शाता है।

आप जहां पर बैठकर पूजा कर रहे हैं उसके नीचे कभी भी लटका हुआ बीम नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा है तो आप वहां से थोड़ा हटकर बैठें। अगर आप ऐसा नहीं करते तो आपको पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता।

वहीं नवरात्रि बच्चों के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। अगर आप चाहते हैं कि बच्चे शिक्षा की क्षेत्र में आगे बढ़ें तो इसके लिए आप अपनी किताबों के फटे हुए कवर को बदलें और अपनी सभी किताबों की केयर सही तरह से करें। इससे भी माता प्रसन्न होती हैं।

मूर्ति की लंबाई संबंधी वास्तु

अगर आप माता की मूर्ति अपने घर में नवरात्रों के दौरान स्थापित करने जा रहे हैं, तो वास्तु के अनुसार घर के अंदर माता की अत्यधिक बड़ी प्रतिमा स्थापित करना शुभ नहीं माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप 3 इंच की लंबाई वाली प्रतिमा की स्थापना अपने घर में करते हैं तो इसका उचित लाभ आपको मिलेगा।

किस दिशा में रखें माता की प्रतिमा?

वास्तुशास्त्र में इस बात का जिक्र किया गया है कि कलश स्थापना के समय माता की प्रतिमा किस दिशा में रखनी चाहिए। अगर आप माता की मूर्ति को पश्चिम या उत्तर की ओर मुख करते हुए रखते हैं तो यह काफी शुभ माना गया है। वहीं नवरात्रों में पूर्व या दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके पूजा की जाए तो उसका फल अधिक मिलता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके माता की पूजा करते हैं तो इससे आपकी चेतना जागृति में सहायता मिलती है। वहीं, अगर दक्षिण की तरफ आपका मुंह है तो आपको मानसिक शांति मिलती है।

पूजा या स्थापना की जगह

आप पूजा घर या जहां भी माता की मूर्ति की स्थापना करने की जगह सुनिश्चित किए हुए हों, उस स्थान के बाहर सिंदूर और हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं, जिससे आपको शुभ फल प्राप्त होगा। इसके साथ ही पूजा वाले स्थान या कमरे में हल्के रंगों का प्रयोग किया जाना चाहिए, जिसमें हल्का पीला, हरा, गुलाबी रंग हो सकता है। माता की प्रतिमा का रंग भी हल्का होना चाहिए, तब आपको सुख-समृद्धि प्राप्त होता है।

कलश स्थापना की तैयारी

माता की प्रतिमा के सामने कलश स्थापना करने से पूर्व कलश में डालने के लिए साबुत सुपारी, फूल, पंचरत्न, इत्र, अक्षत ला कर रख लें। इसके अलावा लकड़ी के पाटे पर बिछाने के लिए सफेद कपड़ा या लाल कपड़ा रख लें। इन सभी सामग्रियों को कलश में डाल दें और पाटे पर कपड़ा बिछाकर कलश स्थापना कर लें। ध्यान रहे, कलश का मुंह ढका होना चाहिए और कलश के ढक्कन पर सफेद चावल भरे होने चाहिए और इसके ऊपर एक नारियल की स्थापना करना आवश्यक है। वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण या उत्तर पूर्व दिशा में कलश स्थापना की जाए तो यह बेहद शुभ होता है।

इस तरह अगर आप माता की चौकी की स्थापना के समय इन बातों का ध्यान रखेंगे तो माता का आशीर्वाद आपको जरूर मिलेगा।

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