स्वदेशी मोबाइल ऐप्स के नाम पर हो सकता है ऑनलाइन फ्रॉड

मुंबई : वाट्सएप पर होने वाले बदलाव को देखते हुए इन दिनों देसी मोबाइल ऐप्स को डाउनलोड करने का चलन काफी बढ़ गया है। इसका फायदा साइबर क्रिमिनल्स उठा रहे हैं। साइबर पुलिस के अनुसार, देसी ऐप्स को डाउनलोड करने के आड़ में अनजान लोग लिंक्स, एसएमएस और प्रलोभन युक्त सामग्रियों को भेज रहे हैं।

साइबर एक्सपर्ट अभिषेक मित्रा के अनुसार, ऐसे किसी भी देसी ऐप्स के नाम पर अनाप-शनाप मोबाइल ऐप्स डाउनलोड करने से बचना चाहिए। देसी या स्वदेशी ऐप के नाम पर ऑनलाइन फ्रॉड होने का खतरा रहता है। इसलिए देसी मोबाइल ऐप्स को डाउनलोड न करें। चूंकि, इन ऐप्स को डाउनलोड करते समय मोबाइल यूजर के बारे में निजी जानकारी हासिल करते हैं। उनके विडियो, ऑडियो, तस्वीरें एवं रिकॉडिंग जैसी जानकारी पर अधिकार हासिल कर लेते हैं। इसलिए मोबाइल यूजर के पास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ खास चीज नहीं रहता है और गोपनीयता भंग होने का संदेह रहता है। इसलिए लोग जब भी सोशल मीडिया यूज करते समय ब्लिंक होने वाले मोबाइल ऐप्स को देखें, तो उसके बारे में गहन जानकारी हासिल करें। जानकारी से संतुष्ट होने के बाद ही उस मोबाइल ऐप्स को डाउनलोड करें और साइबर क्राइम का शिकार होने से बचे रहें।

डॉट एपीएस फाइल वाले ऐप से बचें
डीसीपी रश्मि करंदीकर ने बताया कि मोबाइल ऐप को बिना जांच किए या बिना उसकी ऑथेंटिसिटी जाने बिना उसको ऐप डाउनलोड नहीं करना चाहिए। इन ऐप के ज़रिए ऑनलाइन फ्रॉड या ब्लैकमेल होने के चांस होते हैं। साइबर एक्सपर्ट डॉक्टर प्रशांत माली ने बताया कि डॉट एपीएस फाइल वाले मोबाइल ऐप डाउनलोड कभी नहीं करें। इस प्रकार के मोबाइल ऐप्स हमेशा खतरनाक साबित होते हैं।

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