जानें बच्चों में हर्निया होने के पीछे का असल कारण

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, नवजात शिशुओं में सबसे आम है लेकिन जन्म के बाद कई हफ्तों या महीनों तक अक्सर इस पर ध्यान नहीं जाता। अगर आपके बच्चे को वंक्षण हर्निया होता है, तो आप आमतौर पर आप कमर या अंडकोश में एक उभार देख सकते हैं।

हर्निया तब होता है जब शरीर के किसी अंग या ऊतक का हिस्सा किसी मांसपेशी की दीवार को पुश करता है। यह एक ऐसे स्थान पर धकेल सकता है जहाँ यह नहीं है। यह एक उभार या गांठ का कारण बनता है। बच्चों में हर्निया की समस्या बेहद आम है और इसके इलाज के लिए अक्सर सर्जरी का सहारा लिया जाता है। वैसे तो हर्निया के कई प्रकार होते हैं, लेकिन बच्चों में वंक्षण हर्निया अर्थात् इंगग्वनल हर्निया पाया जाता है। तो चलिए आज हम आपको इसके पीछे के कारण व बचाव के तरीकों के बारे में बता रहे हैं−

जानिए कारण

चाइल्ड केयर एक्सपर्ट बताते हैं कि एक हर्निया बच्चे के जन्म के बाद पहले कुछ महीनों में विकसित हो सकता है। यह पेट की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण होता है। स्टेनिंग और रोना हर्निया का कारण नहीं है, जैसा कि आमतौर पर माना जाता है। लेकिन रोने से बेली पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ता है, जिससे हर्निया साफतौर पर नजर आता है।

ऐसे करें पहचान

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, नवजात शिशुओं में सबसे आम है लेकिन जन्म के बाद कई हफ्तों या महीनों तक अक्सर इस पर ध्यान नहीं जाता। अगर आपके बच्चे को वंक्षण हर्निया होता है, तो आप आमतौर पर आप कमर या अंडकोश में एक उभार देख सकते हैं। उभार आम तौर पर आएगा और जाएगा। आपके बच्चे के रोने के बाद यह बड़ा हो सकता है। रात के दौरान यह छोटा हो सकता है क्योंकि इस दौरान आपका बच्चा आराम कर रहा है।

इलाज

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि वंक्षण हर्निया को ठीक करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है। सर्जरी लक्षणों की गंभीरता और हर्निया के प्रकार पर मुख्य रूप से निर्भर करती है। हर्निया रिपेयर सर्जरी में एक छोटा चीरा आमतौर पर उभार के पास बनाया जाता है और हर्निया की सामग्री को पेट में वापस धकेल दिया जाता है। वहीं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में पेट में छोटे कट्स किए जाते हैं और फिर उपचार किया जाता है। हर्निया सर्जरी में आधे घंटे से लेकर एक घंटे तक का समय लग सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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