दिल्ली पुलिस ने जूम से मांगी मीटिंग में शामिल लोगों की सूची

नई दिल्ली : टूलकिट केस की जांच में अनिता लाल नाम की महिला का नाम जुड़ा जो एमओ धालीवाल की करीबी है। टूलकिट तैयार करने में इस महिला का भी हाथ सामने आया है। यह भी पता चला है क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि ने इंटरनेशनल फार्मर स्ट्राइक के नाम से वाट्स एप ग्रुप बनाया था।

इस टूलकिट को जब ग्रेटा थनबर्ग ने ट्वीट किया तो दिशा ने यूएपीए लग जाने के डर से इस ट्विट को डिलीट करवाकर सबूत नष्ट कर दिए था। इसके साथ ही वाट्स एप ग्रुप भी डिलीट कर दिया गया था। पुलिस को अब इस मामले में पेशे से वकील निकिता जैकब और शांतनु की तलाश है।

दिशा की रिहाई को लेकर मंगलवार को आईसा संगठन के छात्रों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंच प्रदर्शन भी किया। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने इस मामले में कहा कि उसकी गिरफ्तारी नियमों और कानून के तहत हुई है।

दिशा रवि से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ है उसके द्वारा बनाए गए वाट्स एप ग्रुप में 67 लोग शामिल थे, जिनमें कई विदेशी शामिल हैं। यहां तक कि टूलकिट का मसौदा भी वाट्स एप ग्रुप पर तैयार हुआ था। 11 फरवरी को जूम मीटिंग में यह बात तय हुई थी सभी लोग अपने जानकार इंटरनेशनल सेलिब्रेटीज को टूलकिट भेजगें। जिससे यह पता चल सके भारत में किसानों के साथ क्या हो रहा है।

अब पुलिस ने जूम को पत्र लिखकर इस मीटिंग में शामिल हुए लोगों की जानकारी मांगी है। पुलिस को ग्रेटा थनबर्ग और दिशा के बीच हुई बातचीत का एक चैट भी मिला है। दिशा ने बिना एडिट टूलकिट ग्रेटा को भेज दी थी, जिसमें इस टूलकिट को बनाने वालों के नाम भी थे। जैसे ही ग्रेटा ने उसे ट्वीट किया तो दिशा एकदम से घबरा गई थी।

जिसके बाद उसने फौरन ग्रेटा को यह ट्वीट डिलीट करने के लिए बोला था। ग्रेटा ने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया। इसके बाद उसने एडिट किए हुए ट्वीट को पोस्ट किया था। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। वह गूगल डॉक्यूमेंट सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लग चुका था, जिसके बाद मामले में खुद के घिरने के डर से दिशा ने न केवल वाट्स एप ग्रुप डिलीट किया बल्कि इससे जुड़े सबूत नष्ट करने शुरु कर दिए थे।

दिशा रवि पर पुलिस आयुक्त की सफाई
दिशा रवि की गिरफ्तारी पर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने सफाई दी। उन्होंने कहा दिशा के खिलाफ सबूत मिले हैं, जिसके बाद ही नियम और कानून के तहत उस पर कार्रवाई की गई। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह 22 साल की है या फि 50 साल। कोर्ट ने इस कार्रवाई को सही मानते ही उसकी पांच दिन की रिमांड दी थी।

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