जान के लिए घातक हो सकता है कोलन कैंसर

डॉक्टर्स के अनुसार कोलन कैंसर चार स्टेज में होते हैं। पहले स्टेज में पेट में दर्द और मल में रक्त आने जैसी समस्या होती है। इस दौरान मलाशयक के चारों तरफ झिल्लियों पर असर होता है। इसके लक्षण को पहचानकर इलाज किया जा सकता है।

कोलन या कोलोरेक्टल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण काफी आम हैं, लेकिन समय पर इसकी जानकारी न होने पर अंजाम काफी खतरनाक हो सकता है। इसे आम भाषा में बड़े आंत का कैंस भी कहा जाता है। चिकित्सकों के अनुसार 30 साल की उम्र के बाद हर 5 साल में व्यक्ति को कोलोनोस्कोपी नामक टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इसके जरिए इस खतरनाक बीमारी का पता लगाया जा सकता है और वक्त रहते इलाज किया जा सकता है। आइए आपको कोलन या  कोलोरेक्टल कैंसर कैसे होता है, इसके लक्षण, कारण और इलाज क्या हैं इन सभी जानकारी के बारे में बताते हैं…

कोलन या कोलोरेक्टल कैंसर क्या है?

चिकित्सकों के अनुसार व्यक्ति के शरीर में 1।5 मीटर लंबी बड़ी आंत होती है, जिसकी शुरुआत कोलन से शुरू होकर मलद्वार और मलाशय तक समाप्त होती है। इनके बीच की दीवारों में 4 कोशिकाओं की परत होती हैं। जब ये कोशिकाएं अनियंत्रित तौर पर बढ़ जाती हैं तो कोलन या कोलोरेक्टल कैंसर होता है, जिसे बड़ा आंत का कैंसर भी कहा जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक इसके शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देकर इस बीमारी से बचा जा सकता है, लेकिन कई लोग इसके लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं। ऐसे में उनके लिए बाद में समस्या बढ़ जाती है और फिर खतरनाक साबित हो जाती है। विशेषतौर पर इसके लक्षण को महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं, जब उनके मल में रक्त आता है तो वो उसे आम समस्या यानी पीरियड्स समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। हालांकि, अगर आम लक्षण भी नजर आ रहे हो तो डॉक्टर्स से एक बार जरूर संपर्क करना चाहिए।

कितने प्रकार के होते हैं कोलन कैंसर

चिकित्सकों के अनुसार कोलन कैंसर दो प्रकार के होते हैं। एक राइट साइड कोलन कैंसर और दूसरा लेफ्ट साइड कोलन कैंसर होता है। इन दोनों ही प्रकार के कोलन कैंसर के लक्षण भी अलग-अलग होते हैं।

राइट साइड कोलन कैंसर के लक्षण

– शरीर में खून की कमी

– मल में रक्त आना

– मल का रंग काला या महरुन होना

– कमजोरी महसूस होना

– मल में लाल या काले रंग का खून का धब्बा आना

लेफ्ट साइड कोलन कैंसर के लक्षण

– भूख न लगना

– पेट में दर्द या बेचैनी

– कब्ज या मल निकलना बंद होना

– खाने में परेशानी

– पेट फूलना

– वजन कम होना

कोलन कैंसर के चार स्टेज

डॉक्टर्स के अनुसार कोलन कैंसर चार स्टेज में होते हैं। पहले स्टेज में पेट में दर्द और मल में रक्त आने जैसी समस्या होती है। इस दौरान मलाशयक के चारों तरफ झिल्लियों पर असर होता है। इसके लक्षण को पहचानकर इलाज किया जा सकता है। वहीं, दूसरे स्टेज में कैंसर के सेल्स वॉल्स में फैलने लगते हैं और लक्षण सामने आने लगते हैं। इस स्टेज में भी इलाज संभव है। जबकि, स्टेज 3 में लिम्फ नोड्स और ऊतकों को कैंसर के कोशिकाएं असर करती हैं। हालांकि, इससे शरीर का अन्य भाग प्रभावित नहीं होता है। इस स्टेज में इलाज किया जा सकता है। कोलन कैंसर का स्टेज-4 पूरे शरीर में फैंलना शुरू हो जाता है, इस दौरान लिवर और फेफड़े प्रभावित होते हैं। इस स्टेज में इलाज करना संभव नहीं पाता है। लास्ट यानी स्टेज-4 में मल आना पूरी तरह से बंद हो जाता है। इस दौरान मरीज को मेटल धातु का स्टेप्ल लगाया जाता है, जिससे मल बाहर निकलता है। इसके अलावा स्टेज-4 में मरीज को जीवन जीने के लिए थेरेपी भी दी जाती है।

कोलन कैंसर के कारण

1. अधिक धूम्रपान करना

2. शारीरिक गतिविधियां न करना

3. शराब का अधिक सेवन

4. शरीर में पॉलीप्स बनना

5. डायबिटीज

6. अनुवांशिक कारण

7. देर रात तक काम करना

8. लो फाइबर डाइट लेना

9. खानपान में लापरवाही

कोलन कैंसर का बचाव

– हरी सब्जियां और ताजे फलों का करें सेवन

– फाइबरयुक्त आहार का करें सेवन

– धूम्रपान का सेवन करें बंद

– एंटीऑक्सीडेंट से भरा आहार खाएं

– हर छोटी सी छोटी समस्या पर ध्यान दें

– मल में रक्त आने की समस्या पर डॉक्टर से संपर्क करें।

– एक्सरसाइज या योग जरूर करें।

डॉक्टर्स ऐसे करते हैं कोलन कैंसर का इलाज

चिकित्सकों के अनुसार चार तरीकों से कोलन कैंसर का इलाज किया जाता है। इसमें सबसे एडवांस के तौर पर कीमोथेरेपी है। इसके अलावा रेडिया थेरेपी और ऑपरेशन से भी कोलन कैंसर का इलाज किया जाता है। माइक्रोस्कोप भी अधिक एडवांस माना जा रहा है, जो जैनेटिक स्कैन करता है। इसके जरीए भी मरीजों का इलाज किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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