स्टूडेंट्स से अब मांगा जा रहा है 800 रुपए विलंब शुल्क

रांची : रांची यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा बिना किसी गलती के ही पीजी छात्रों को आर्थिक दंड भरने का फरमान जारी कर दिया गया है। आरयू प्रशासन के इस फैसले से स्टूडेंट्स और शिक्षक असहज हैं। मामला रांची विवि के पीजी फिलॉस्फी डिपार्टमेंट के सेकेंड सेमेस्टर के स्टूडेंट्स से संबंधित है। आरयू प्रशासन ने पीजी फिलॉस्फी विभाग में सेकेंड सेमेस्टर का एग्जाम फाॅर्म जमा करने के संबंध में नोटिफिकेशन या ग्रुप में मैसेज नहीं भेजा गया।

इस कारण फिलॉस्फी के छात्र परीक्षा फाॅर्म जमा नहीं कर सके। तिथि समाप्त होने के बाद छात्रों ने परीक्षा फाॅर्म जमा करने के लिए विभाग में संपर्क किया। इस मामले में वीसी डॉ. रमेश कुमार पांडेय की अध्यक्षता वाली एग्जाम बोर्ड में रखा गया। बोर्ड ने सभी छात्रों से आठ-आठ सौ रुपए फाइन लेकर परीक्षा फाॅर्म जमा करने की स्वीकृति प्रदान कर दी। बताते चलें फिलॉस्फी सेकेंड सेमेस्टर में 27 स्टूडेंट्स हैं।

ऐसे जमा होता है ऑनलाइन फाॅर्म

कोरोना काल में पहली ऑनलाइन फाॅर्म जमा होना शुरू हुआ। दो माह पहले पीजी सेकेंड सेमेस्टर (2019-21) का फाॅर्म जमा होना शुरू हुआ। फाॅर्म जमा करने के लिए सभी विभागों को लॉगइन आईडी दिया जाता है, जहां सभी विद्यार्थियों का डेटाबेस रहता है। छात्र के नाम के सामने एक कॉलम रहता है, जिसमें इनेबल या डिसएबल ऑप्शन है। इनेबल करने पर ही स्टूडेंट्स ऑनलाइन परीक्षा शुल्क जमा कर सकते हैं। लेकिन, आरयू ने विभाग को किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी।

फाइन के लिए नहीं हैं छात्रों के पास राशि

फिलॉस्फी के अधिकांश छात्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। बिना गलती के आर्थिक दंड लगाने पर छात्र परेशान हैं। कई छात्रों ने रोते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. श्यामा नंद झा को बताया कि फाइन जमा करने के लिए पैसे नहीं हैं। विभागाध्यक्ष ने कहा कि जिन छात्रों के पास पैसे नहीं हैं, वे हमसे ले सकते हैं। जॉब मिलने के बाद वापस कर देंगे। अब तक 12 हजार रुपए मदद कर चुके हैं।

विभाग के एचओडी डॉ. एसएन झा से सीधी बात

सवाल- छात्रों को परीक्षा फाॅर्म जमा करने का डेट नहीं बताया गया तो विलंब शुल्क क्यों लिया जा रहा है?
-छात्रों की गलती नहीं है, विवि से ही फाॅर्म जमा करने के संबंध में किसी प्रकार सूचना नहीं मिली।
सवाल- जब छात्रों को गलती नहीं है तो आरयू प्रशासन के समक्ष छात्रों का पक्ष क्यों नहीं रखा?
-परीक्षा बोर्ड की बैठक के समय ही छात्रों का पक्ष रखा था, लेकिन नहीं सुनी गई।

विभागाध्यक्ष ने कहा… आरयू प्रशासन नहीं सुन रहा, जिन छात्रों के पास पैसे नहीं हैं, वे हमसे ले सकते हैं। जॉब मिलने के बाद वापस कर देंगे। अब तक 12 हजार रुपए मदद कर चुके हैं।

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