मोहन देलकर ने मुंबई के एक होटल में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी

मुंबई :
दादरा-नगर हवेली के सांसद मोहन देलकर आत्महत्या मामले में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बड़ा बयान दिया है। देशमुख ने कहा है कि जिन लोगों का भी नाम दिवंगत सांसद ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

प्रफुल्ल पटेल जो फिलहाल दादरा-नगर हवेली के एडमिनिस्ट्रेटर हैं, उनका भी नाम इस सुसाइड नोट में है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या केंद्र सरकार की तरफ से प्रफुल्ल पटेल  पर किसी प्रकार का दबाव था। इसके अलावा क्या प्रफुल्ल पटेल का दबाव एडमिनिस्ट्रेशन पर था?

इन तमाम बातों की जांच पुलिस करेगी और उसके अनुसार दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। मुंबई में आकर आत्महत्या करने के पीछे क्या वजह थी? इन तमाम बातों से जल्द पर्दा उठेगा। अनिल देशमुख ने साफ कहा है कि सांसद को न्याय दिलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार के पास ज्ञापन आए हैं और हम उस पर संजीदगी से काम कर रहे हैं ।

होटल में किया था सुसाइड
दादरा और नगर हवेली  के सांसद मोहन देलकर ने दक्षिण मुंबई के एक होटल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली की लोकसभा सीट से मोहन देलकर संसद सदस्य के रूप में काम करने वाले स्वतंत्र राजनेता थे। 19 दिसंबर 1962 को सिलवासा में जन्मे देलकर का पूरा नाम मोहन संजीभाई देलकर था।

2019 में 7वीं बार पहुंचे थे लोकसभा

मोहन देलकर ने 2019 लोकसभा का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था और बीजेपी के नथुभाई गोमनभाई पटेल को नौ हजार वोटों से शिकस्त दी थी। मोहन देलकर ने 2019 में सातवीं बार लोकसभा का रास्ता तय किया था।

आदिवासी लोगों के लिए किया संघर्ष
मोहन देलकर ने सिलवासा में एक ट्रेड यूनियन नेता के रूप में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने यहां अलग-अलग कल-कारखानों में काम करने वाले आदिवासी लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और संघर्ष किया।

1989 में पहली बार चुन गए लोकसभा गए मोहन देलकर
मोहन देलकर ने आदिवासियों के लिए 1985 में आदिवासी विकास संगठन शुरू किया। 1989 में वे दादरा और नगर हवेली निर्वाचन क्षेत्र से 9वीं लोकसभा के लिए एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुने गए।

2 बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे
इसके बाद 1991 और 1996 में भी देलकर ने दादरा और नगर हवेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि इस बार उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में फिर से लोकसभा का रास्ता तय किया।

1998 में भगवा झंडा लेकर तय किया लोकसभा का सफर
1998 के लोकसभा चुनाव में देलकर ने फिर से उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, हालांकि इस बार वे भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा के लिए चुने गए।

1999 और 2004 में चुने गए सांसद
1999 और 2004 के चुनाव में भी मोहन देलकर लोकसभा पहुंचे। हालांकि इस दौरान उन्होंने निर्दलीय और भारतीय नवशक्ति पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।

2020 में जदयू में हुए शामिल
4 फरवरी 2009 को मोहन देलकर एक बार फिर कांग्रेस में फिर से शामिल हो गए लेकिन वह लोकसभा नहीं जा सके। इसके बाद 2019 में उन्होंने खुद को कांग्रेस पार्टी से अलग कर लिया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुने गए। हालांकि 2020 में वह जनता दल (यूनाइटेड) पार्टी में शामिल हो गए।

मौके पर मिला खुदकुशी का नोट
मुंबई पुलिस को प्रवक्ता ने बताया कि सांसद मोहन देलकर मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन के एक होटल में मृत पाए गए। मौके पर एक सुसाइड नोट मिला है, एसीपी कोलाबा मामले की जांच कर रहे हैं।

नोट में बड़े नेताओं के नाम का जिक्र
सूत्रों के मुताबिक गुजराती में लिखे सुसाइड नोट में मोहन देलकर ने बड़े नेताओं के नामों का भी जिक्र किया है। देलकर की सुसाइड नोट में यह भी जिक्र है कि बड़े नेता उन्हें अपमानित करते थे। साथी और पक्षपात का भी शिकार हुए हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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