यम द्वितीया के दिन चित्रगुप्त पूजा से होते हैं विशेष लाभ

यम द्वितीया के दिन ही चित्रगुप्त पूजा होती है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजा होती है। दिवाली के चित्रगुप्त पूजा का खास महत्व होता है, तो आइए हम आपको चित्रगुप्त पूजा की विधि तथा महत्व के बारे में बताते हैं।

चित्रगुप्त पूजा के बारे में जानकारी 

चित्रगुप्त महाराज को देवताओं का लेखपाल माना जाता है। चित्रगुप्त जी मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा करते हैं। इस दिन नई कलम को चित्रगुप्त महाराज का प्रतिरूप माना जाता है। और नई कलम की पूजा होती है। व्यापारी वर्ग इसे नववर्ष की शुरूआत मानते हैं। आमतौर पर चित्रगुप्त शब्द का अर्थ होता है वह देवता जो सभी के हृदय में मौजूद हों। वर्तमान में हमें अपने हृदय में चित्रगुप्त को जाग्रत की आवश्यकता है। इसके लिए हम खुद भी पढ़े और देशवासियों को भी साक्षर करने में सहायता करें। यही इस पर्व का मूल संदेश होता है। इसी संदेश हेतु यह त्यौहार धूमधाम से पूरे देश में मनाया जाता है।

कौन हैं चित्रगुप्त 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने स्वयं चित्रगुप्त को उत्पन्न किया था। चित्रगुप्त जी महाराज को ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण उन्हें कायस्थ भी कहा जाता है। साथ ही चित्रगुप्त का विवाह सूर्य की पुत्री यमी से हुआ था। इस तरह से चित्रगुप्त रिश्ते में यमराज के बहनोई हैं। यमराज और यमी भाई-बहन हैं और उन्हें सूर्य की जुड़वा संतान माना जाता है। यमी ने बाद में यमुना का रूप धारण कर लिया और वह धरती पर यमुना नदी के रूप में बहने लगीं।

चित्रगुप्त की पूजा भी होती है खास 

यम द्वितीया के दिन नहा कर पवित्रता पूर्वक वस्त्र धारण करें। उसके बाद पूजा घर में पूरब की दिशा में एक चौक बना लें। उस चौके पर चित्रगुप्त महाराज की तस्वीर स्थापित कर लें। इसके बाद पूजा आरम्भ करें। पूजा में सबसे पहले विधिवत अक्षत्, पुष्प, धूप, फल और मिठाई चढ़ाएं। साथ ही एक नई लेखनी या कलम भी जरूर चढ़ाएं। इसके अलावा कलम-दवात की भी पूजा करें। उसके बाद एक कोरे सफेद कागज पर श्री गणेशाय नम: और 11 बार ओम चित्रगुप्ताय नमः लिखें। अंत में चित्रगुप्त महाराज से अपने और परिवार के लिए बुद्धि, विद्या और लेखन का अशीर्वाद मांगें। यही नहीं चित्रगुप्त पूजा के दिन बहन के घर जाकर भोजन करने का खास महत्व है। ऐसा करने से भाई दीर्घायु होते हैं और उनकी परेशानियां खत्म हो हैं। इस दिन यमुना स्नान और पूजन का भी महत्व है।

पूजा का भी है खास मुहूर्त

चित्रगुप्त पूजा विशेष मुहूर्त में करना लाभकारी होता है। कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि को 16 नवंबर सुबह 07:06 बजे से शुरू हो रही है, जो 17 नवंबर को तड़के 03:56 बजे तक है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है प्रातः 06:45 से दोपहर 02:37 तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 01:53 बजे से दोपहर 02:36 तक है। आप इन मुहूर्त में चित्रगुप्त पूजा कर सकते हैं।

चित्रगुप्त मंदिर के बारे में भी जानें

चित्रगुप्त की पूजा प्राचीन काल से ही होती है लेकिन गुप्तकाल में इनके पूजा को खास प्राथमिकता मिली। श्री चित्रगुप्त जी के भी चार धाम हैं जो उज्जैन, कांचीपुरम, अयोध्या और पटना में मौजद हैं। इन स्थानों पर चित्रगुप्त की खास पूजा होती है। साथ ही रीवा, भरमौर, नई दिल्ली, मैहर, गुना, गया, खजुराहो, शिवपुरी, जगन्नाथपुरी, गोरखपुर प्रयागराज, हैदराबाद, वाराणसी, भोपाल, बक्सर, भोपाल, कानपुर, जबलपुर और ग्वालियर में भी चित्रगुप्त मंदिर मौजूद हैं।

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