पहाड़ पर बने गोले पर निशाना, लगा तो बेटा, नहीं तो बेटी

लोहरदगा : बेड़ो में 500 साल पुरानी नागवंशी राजाओं के समय की मान्यता, मायने बदलेलिंगानुपात में झारखंड बेहतर हो रहा फिर इस परंपरा को क्यों ढो रहे?

कहा जाता है कि 500 साल पहले नागवंशी राजाओं के समय मान्यता थी कि चांद पहाड़ पर बने गोले पर पत्थर मारो। लग गया तो बेटा यानी वारिस, नहीं लगा तो बेटी होगी। समय के साथ देश के इस हिस्से में सोच में परिवर्तन आया। बेटियों की संख्या बढ़ने लगी। वे पूजी जाने लगीं। इसी सोच के बलबूते झारखंड में लिंगानुपात देश में बेहतर स्थिति में पहुंच गया। आज यहां प्रति 1000 लड़के पर 948 लड़कियां हैं। जनजातीय आबादी में तो लड़कियों का आंकड़ा 1003 है। मतलब राष्ट्रीय औसत से कहीं अच्छा। रांची जिले के बेड़ो प्रखंड में जहां यह चट्‌टान स्थित है, वहां महिला-पुरुषों का अनुपात बराबर-बराबर है।

गांव के 82 वर्षीय गणिनाथ साहू व 76 वर्षीय रामचंद्र साहू बताते हैं कि 500 साल पुरानी यह मान्यता खुखरागढ़ के अंतिम नागवंशी राजा चिंतामणि शरणनाथ शाहदेव (जन्म-1931) के समय से देख रहे हैं। लेकिन, बेटा-बेटी के जन्म में कभी गांववालों ने फर्क नहीं किया। इस गांव में पुरुष 52% और महिलाएं 48% हैं।

सुकून- सिर्फ मान्यता निभ रही तभी गांव में महिलाएं 48%

04% अंतर ही है महिला पुरुष आबादी में जिस गांव में यह प्रथा जारी50:50 अनुपात है बेड़ो प्रखंड में महिला और पुरुष की आबादी के बीच950 लिंगानुपात है रांची का जबकि राज्य का 948 देश से 29 ज्यादा1003 जनजातीय महिलाएं हैं 1000 पुरुषों पर झारखंड में

चांद पहाड़ के बगल में चांदनी पहाड़ भी है

चांद पहाड़ के बगल में चांदनी पहाड़ भी है। ग्रामीण बताते हैं कि इस पहाड़ पर नागवंशी राजा पूजा-पाठ करते थे। चांदनी पहाड़ पर नागवंशी रानियां विहार करती थीं।

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