पुलिस ने रवि पुजारी को मकोका कोर्ट के सामने गजाली होटल फायरिंग मामले में पेश किया

मुंबई : अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी  को आज ग़ज़ाली होटल फायरिंग मामले में मकोका कोर्ट में पेश किया है। आपको बता दें कि इस मामले में अदालत ने रवि पुजारी को 9 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। रवि पुजारी पर मुंबई समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में कई मुकदमे दर्ज हैं। सीनियर इंस्पेक्टर सचिन कदम के अनुसार, पांच साल पहले हुए उस शूटआउट में सात आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। रवि पुजारी को करीब दो साल पहले सेनेगल में गिरफ्तार किया गया था। उसके कुछ महीनों बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया था। पहले कर्नाटक पुलिस ने उसकी कस्टडी ली थी। अब मुंबई पुलिस  को उसकी हिरासत मिली है।

मुंबई में दर्ज हैं 78 केस, कई केसों में लगा मकोका

मुंबई में उस पर कुल 78 केस दर्ज हैं। इनमें से 49 केसों में उसका सीधा जुड़ाव सामने आया था। कई केसों में उस पर मकोका लगा है। मुंबई क्राइम ब्रांच एक-एक कर उसकी अलग-अलग केसों में कस्टडी लेगी। अगले कुछ महीनों तक मुंबई पुलिस के लॉकअप रहेगा। बाद में उसे जेल भेजा जाएगा। कर्नाटक में उसके खिलाफ 97 केस दर्ज हैं।

फ्रेंच भाषा में हुआ था अनुवाद
जब रवि पुजारी को सेनेगल में पकड़ा गया था और उसके प्रत्यर्पण की कोशिशें चल रही थीं, तब मुंबई क्राइम ब्रांच ने सीबीआई को दो किस्तों में उसके करीब दो दर्जन केसों का अंग्रेजी में अनुवाद करवाकर दिल्ली भेजा था। वहां से इसका फ्रेंच भाषा में अनुवाद कर सेनेगल भेजा गया था। तब अजय सावंत मुंबई हफ्ता निरोधक प्रकोष्ठ के प्रभारी थे।

महेश भट्ट की हत्या की साजिश रचने का आरोपी

रवि पुजारी मुंबई से जुड़े जिन केसों में वॉन्टेड दिखाया गया था, उनमें से एक केस फिल्म फाइनैंसर अली मोरानी के बंगले पर हुई गोलीबारी से भी जुड़ा था। इस केस में कुछ महीने पहले रवि पुजारी के साथी ओबेद रेडियोवाला को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। मोरानी केस के अलावा महेश भट्ट की हत्या की साजिश रचने के मामले में भी रवि पुजारी आरोपी है।

कई साल तक गिरफ्त से बचता रहा था डॉन
रवि पुजारी भले ही तीन साल पहले सेनेगल में गिरफ्तार किया गया, लेकिन इस डॉन को सबसे पहले तब विदेश में लोकेट किया गया था, जब हिमांशु राय मुंबई क्राइम ब्रांच चीफ थे। उस दौरान उन्होंने एक संदिग्ध की कॉल कई दिन तक इंटरसेप्ट की थी, जो रवि पुजारी से सीधे बात कर रहा था। उसी में पुजारी ने उसे डरबन बुलाया। दोनों वहां एक होटल में सात दिन तक ठहरे थे। राय ने तत्काल यह सूचना केंद्रीय गृहमंत्रालय में कुछ करीबियों तक दिल्ली पहुंचाई थी। बात जब तक अंजाम तक पहुंचती, रवि पुजारी और उसके साथी ने डरबन का वह होटल छोड़ दिया और फिर किसी अज्ञात स्थान पर भाग गए थे।

पहले भी मुंबई पुलिस की गिरफ्त से बच गया था

क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने एक बार एनबीटी को बताया था कि इस डॉन की एक बार और भी लोकेशन ट्रेस की गई थी। मुंबई के डीसीपी और जॉइंट सीपी रैंक के दो अधिकारी तब अलग-अलग ट्रिप में दिल्ली भी गए थे, पर बात बाद में कहां बिगड़ी, इसका पता नहीं चल पाया। इस सूत्र का दावा है कि जॉइंट सीपी रैंक का जो अधिकारी दिल्ली गया था, उसने एफबीआई से भी रवि पुजारी को ट्रैप में लेने के लिए मदद मांगी थी।

मुंबई में बनती थीं ई-मेल आईडी
एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनबीटी को बताया कि जहां तक उन्हें जानकारी है, रवि पुजारी की अलग-अलग ई-मेल आईडी मुंबई में बनती थीं। इन्हें बनाने वाला रवि पुजारी को मेल आईडी के साथ-साथ फोन पर इनका पासवर्ड भी लिखवाता था। चूंकि आईडी बनाने वाले को पासवर्ड पता ही रहता था, इसलिए वह रवि पुजारी के लिखे गए हर मेल को पढ़ भी लेता था। उसी प्रक्रिया में एक ऐसा मेल सामने आया था, जो पुजारी ने मुंबई के एक रिटायर अडिशनल डीजी को बेहद गरियाते हुए किसी को लिखा था। क्राइम ब्रांच ने मेल बनाने वाले इस आरोपी को जब गिरफ्तार किया था, तब उसके बहाने पुजारी की गालीगलौज वाली वह स्क्रिप्ट भी हाथ लगी थी।

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