भगवान शिव के आशीर्वाद से मनोवांछित फल मिलेगा

भगवान शिव को भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। यदि पूरी आस्था से शिव का ध्यान किया जाए तो वह शिवभक्तों की पुकार जरूर सुनते हैं। इसके लिए भगवान शिव की पूजा करने से पहले आप कुछ उपाय आजमा सकते हैं। इन सभी उपायों का उल्लेख शिवमहापुराण में मिलता है।

महादेव को प्रसन्न करने के लिए

महादेव को प्रसन्न करने के लिए स्वयं महालक्ष्मी ने बेलवृक्ष का रूप लिया था और शिवलिंग को अपनी छाया प्रदान करती थीं. खुश होकर शिवजी ने महालक्ष्मी से कहा कि बेलवृक्ष की जड़ों में मेरा निवास होगा और बेलपत्र मुझे अतिप्रिय होगा.

कालकूट विष पीने के बाद शिवजी के मस्तिष्क को शांत करने के लिए देवों ने उन्हें जल से नहलाया. उसके बाद बेलपत्र सिर पर रखे. बेलपत्र की तासीर ठंढ़ी होती है इसलिए शिवजी को जल के साथ बेलपत्र अतिप्रिय है.

बिल्ववृक्ष का दर्शन, स्पर्श व प्रणाम भी पुण्यकारी है. शिवजी को अखंडित बेलपत्र चढ़ाने से शिवलोक प्राप्त होता है. बेलपत्र के लिए कुछ सावधानियां कही गई हैं. चौथ, अमावस्या, अष्टमी, नवमी, चौदस, संक्रांति व सोमवार को बिल्वपत्र तोडना मना है.

भगवान शिव को कौन-सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है-

चीनी (शक्कर) महादेव का शक्कर से अभिषेक करने से सुख और समृद्धि बढ़ती है. ऐसा करने से मनुष्य के जीवन से दरिद्रता चली जाती है.

बेलपत्र उल्टा अर्पित करें यानी पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग को स्पर्श करे. पत्र में चक्र या वज्र नहीं होना चाहिए. कीड़ों द्वारा बनाए सफेद चिन्ह को चक्र व बेलपत्र के डंठल के मोटे भाग को वज्र कहते हैं. 3 से 11 पत्ते तक के बेलपत्र होते हैं. जितने अधिक पत्रों के हों उतना उत्तम.बेलपत्र चढ़ाते समय इस मंत्र का उच्चारण करें-

शिवजी को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का उच्चारण करें

त्रिद्लं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्।
त्रिजन्मं पापसंहारम् एक बिल्व शिव अर्पिन।।

यदि मंत्र याद न हो तो ऊं नमः शिवाय जपें.बेलपत्र न मिल पाए तो उसके स्थान पर चांदी का बेलपत्र चढ़ाया जा सकता है जिसे रोज शुद्धजल से धोकर शिवलिंग पर पुनः अर्पण कर सकते हैं. बेलवृक्ष की जड़ में शिव का वास है इसलिए जड़ में गंगाजल के अर्पण का बड़ा महत्व है.

पुराणों में ज्योतिष से सम्बन्धित बहुत से उपाय दिये गये है जिसको आप करके आप अपने सभी कष्टो से निजात पा सकते है शिव महापुराण में दिये गये ज्योतिष के उपाय की आज बात करते है ये हैं शिवपुराण के छोटे-छोटे उपाय, कर सकते हैं भगवान शिव बहुत भोले हैं, यदि कोई भक्त सच्ची श्रद्धा से उन्हें सिर्फ एक लोटा पानी भी अर्पित करे तो भी वे प्रसन्न जाते हैं है इसीलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है

इन उपायों से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव

1 भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है

  1. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है
  2. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है
  3. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है
    यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में बांट देना चाहिए

5 बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।

  1. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
  2. शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
  3. शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
  4. शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।

10 यदि शारीरिक रूप से कमजोर कोई व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक गाय के शुद्ध घी से करे तो उसकी कमजोरी दूर सकती है हो

भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है-

11 लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  1. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
  2. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
  3. शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
  4. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
  5. जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
  6. कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।
  7. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
  8. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में
    शुभ माना गया है।

20 दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है

इन उपायों से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव

  1. सावन में रोज 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
  2. अगर आपके घर में किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो सावन में रोज सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करें तथा गुग्गुल का धूप दें।
  3. यदि आपके विवाह में अड़चन आ रही है तो सावन में रोज शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध चढ़ाएं। इससे जल्दी ही आपके विवाह के योग बन
    सकते हैं।
  4. सावन में रोज नंदी (बैल) को हरा चारा खिलाएं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि आएगी और मन प्रसन्न रहेगा।
  5. सावन में गरीबों को भोजन कराएं, इससे आपके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होगी तथा पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।
  6. सावन में रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निपट कर समीप स्थित किसी शिव मंदिर में जाएं और भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पण करें। इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इससे मन को शांति मिलेगी।
  7. सावन में किसी नदी या तालाब जाकर आटे की गोलियां मछलियों को खिलाएं। जब तक यह काम करें मन ही मन में भगवान शिव का ध्यान करते रहें। यह धन प्राप्ति का बहुत ही सरल उपाय है मित्रों जरूर करे

शिवजी को चढ़ने वाले पंचामृत

शिवजी को चढ़ने वाले पंचामृत में भी एक गूढ़ संदेश है. पंचामृत दूध, दही, शहद व घी को गंगाजल में मिलाकर बनता है.

दूधः Milk

जब तक बछड़ा पास न हो गाय दूध नहीं देती. बछड़ा मर जाए तो उसका प्रारूप खड़ा किए बिना दूध नहीं देती. दूध मोह का प्रतीक है.

शहदः Honey

मधुमक्खी कण-कण भरने के लिए शहद संग्रह करती है. इसे लोभ का प्रतीक माना गया है.

दहीः Curd

इसका तासीर गर्म होता है.क्रोध का प्रतीक है.

घीः Ghee

यह समृद्धि के साथ आने वाला है और अहंकार का प्रतीक है.

गंगाजलः भगीरथ के पूर्वजों ने पितरों की मुक्ति के लिए शिवजी की उपासना की और गंगाजल को पृथ्वी पर लेकर आए. यह मुक्ति का प्रतीक है. गंगाजल मोह, लोभ, क्रोध और अहंकार को समेटकर शांत करता है.

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