बौराने लगे फाल्गुन के दिन

कोलकाता। बड़ा बाजार लाइब्रेरी के आचार्य विष्णुकांत शास्त्री सभागार में आयोजित द्वैमासिक साहित्यिक गोष्ठियों अंतर्गत काव्य गोष्ठी हुई। गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र (देहरादून) की अध्यक्षता में यह आयोजन हुआ। इसमें शहर के कवियों ने अपनी रचनाओं से साहित्य के रसिक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। रीमा पांडे के सरस्वती वंदना से शुरुआत हुई। मिश्र के काव्य स्वर-फाल्गुन के दिन बौराने लगे, दबे पांव आकर सिरहाने, हवा लगी की बांसुरी बजाने, दुखता सिर सहलाने लगे ने समां बांधा। मिश्र ने कहा कि केंद्रीय साहित्य अकादमी दिल्ली की ओर से महाकवि श्याम नारायण पांडे का संचयन प्रकाशित हो रहा है जिसके संपादन में बड़ा बाजार लाइब्रेरी पुस्तकालय का मुख्य योगदान है। उपस्थित कवियों में राम पुकार सिंह, नंदलाल रोशन, कृष्णकांत दुबे, विजय कुमार विद्रोही, कामायनी संजय, देवेश कुमार मिश्र ,निशा कोठारी, चन्द्रकिशोर चौधरी, शम्भूलाल जालान, संजय कुमार सिंह, नंदू बिहारी तथा रामाकांत सिन्हा आदि ने विभिन्न भावों एवं रसों से भरपूर गीतों एवं कविताओं का पाठ किया। संचालन शहर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गिरधार राय ने किया। धन्यवाद ज्ञापित बड़ा बाजार लाइब्रेरी के सचिव अशोक कुमार गुप्ता ने किया। मौके पर लाइब्रेरी के अध्यक्ष महावीर प्रसाद अग्रवाल, उपाध्यक्ष जय गोपाल गुप्ता व विजय कुमार पाण्डेय सहित अन्य साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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