7 फरवरी 1921 को हुए सत्र से पहले पटना कॉलेज सभागार में 1913 में हुई थी परिषद की पहली बैठक

जामताड़ा (सर्च खबर) :  पटना : बिहार-उड़ीसा प्रांत के गठन के बाद बिहार विधान परिषद की पहली बैठक 20 जनवरी 1913 को पटना कॉलेज के सभागार में हुई थी। यह इसलिए कि तब विधान परिषद का अपना स्थाई सभागार नहीं था। सचिवालय नहीं था। 1920 तक परिषद की बैठक गुलजारबाग (पटना) गवर्नमेंट हाउस (रांची) आदि स्थानों पर होती रही। विधान परिषद का अपना भवन 1920 में बनकर तैयार हो गया।

नवनिर्मित काउंसिल चैंबर में 7 जनवरी 1921 को विधान परिषद की पहली बैठक हुई। उद्धाटन, प्रांत के पहले गर्वनर लॉर्ड सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा ने किया। पहले साल ही 38 संकल्प पारित किए गए। 31 मार्च,1921 को सदन में प्रस्ताव लाया गया कि ईस्ट इंडिया रेलवे अधिकारियों को कोईलवर में सोन नदी पर बने पुल पर ऐसी व्यवस्था करने के लिए कहे, जिससे उस पुल से मोटरगाड़ियों का भी आवागमन हो सके।

विधानमंडल का गठन एक लंबे संघर्ष का प्रतिफल है। बिहार को बंगाल से अलग करने की मांग तब टिमटिमाती हुई नजर आई जब 25 अगस्त 1911 को भारत सरकार के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया को पत्र भेजकर बिहार एवं उड़ीसा को बंगाल से अलग करने की सिफारिश की।

सिफारिश का जवाब 1 नवंबर 1911 को आया और ठीक एक महीने बाद 12 दिसंबर 1911 को इंग्लैंड के सम्राट ने बिहार-उड़ीसा के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त करने की घोषणा कर दी। और 22 मार्च 1912 को दिल्ली दरबार में सम्राट ने बिहार-उड़ीसा प्रांत बनाने एलान कर दिया। 1 अप्रैल, 1912 को चार्ल्स स्टूअर्ट बेली पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर बने और नवगठित प्रांत की सत्ता का केंद्र पटना बन गया। प्रांतीय विधान परिषद का गठन हुआ जिसमें 43 सदस्य थे।

29 नवंबर 1920 को हुआ विधान परिषद का चुनाव विधान परिषद का पहला चुनाव 29 नवंबर 1920 को हुआ। तब कांग्रेस पहले ही चुनावों के बहिष्कार का निर्णय कर चुकी थी। तब सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई। 70% सीट निर्वाचित सदस्यों द्वारा भरे जाने थे। सरकारी सदस्यों की संख्या 76 थी, नामित गैर सरकारी सदस्य 12 थे और अन्य 15, कुल 103 संख्या थी। राज्यों को हस्तांतरित विषयों में शिक्षा, पुस्तकालय, संग्रहालय, स्थानीय स्वशासी निकाय, चिकित्सा सहायता, लोक स्वास्थ्य व स्वच्छता, कृषि, सहयोग समितियां, मत्स्य, लोक अभियंत्रण, उत्पाद, उद्योग, माप-तौल, धार्मिक एवं परोपकारी संपत्ति इत्यादि। आज भी कमोबेश ये विषय राज्यों के पास हैं।

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