भागीरथी व सोनिया विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में गंदगी का स्तर 8000 के पार

नई दिल्ली : दिल्ली जल बोर्ड ने उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से आई भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और सोनिया विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में बढ़ चुकी गंदगी के स्तर को दूर कर लिया है। अब पानी भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 100 प्रतिशत और सोनिया विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 80 प्रतिशत क्षमता से कर रहा है काम कर रहा है इसलिए दिल्ली के लोगों को आ रही पानी की समस्या दूर होगी।

यह जानकारी सोमवार को दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने दी। राघव चड्ढा आज जल बोर्ड के अधिकारियों के साथ भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा करने के लिए आए थे। राघव चड्ढा ने पत्रकारों को बताया कि उत्तराखंड में आई आपदा के कारण दिल्ली के कुछ इलाकों में प्रभावित जलापूर्ति की समस्या को दूर कर दिया गया है।

उत्तराखंड में आई आपदा के बाद अपर गंगा कैनाल में लकड़ी, पौधे, कीचड़ और मलबा आदि के आ जाने से जल में गंदगी का स्तर(एंटीयू) 100 से बढ़कर 8000 के पार पहुंच गया था। इस कारण से सोनिया विहार और भागीरथी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की उत्पादन क्षमता बहुत कम हो गई थी और दक्षिणी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली के इलाकों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई।

गंगा जल में आ रही एंटी यू के मात्रा को 960 किया
राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड के सभी अधिकारियों और इंजीनियर ने दिन रात मेहनत करके इस गंदगी को, उत्तराखंड में आई आपदा की वजह से जो गंगा नदी में आ रही थी, उसे कम किया है। गंगा नदी से आ रही जल में 8000 एंटी यू गंदगी का आंकड़ा पहुंच गया है, उसे घटाकर इस समय 960 एंटी यू तक ले आए हैं यानी अब गंदगी लगभग 10 प्रतिशत रह गई है और एंटी यू को 90 प्रतिशत तक साफ किया जा चुका है।

वायु प्रदूषण फैलाने पर ईस्ट एमसीडी ने किए किए 8989 इकाईयों के चालान

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए पूर्वी दिल्ली नगर निगम विभिन्न क्षेत्र में निरीक्षण कर निर्माण गतिविधियों के कारण उत्पन्न प्रदूषण और प्रदूषण फैला रही इकाइयों के खिलाफ कार्यवाही की। 17 अक्टूबर 2020 से 12 फरवरी 2021 तक के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने खुले में अवैध रूप से कूड़ा डालने पर 6237 चालान, खुले में कूड़ा जलाने पर 192 चालान किए।

खुले में अवैध रूप से मलबा डालने के लिए 973 चालान किए, निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण के लिए 1098, निर्माण एवं स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए 535 चालान किए हैं। इस प्रकार पूर्वी निगम द्वारा कुल 8989 चालान किए और इसकी एवज में लगभग 48 लाख 80 हजार 860 रुपए वसूल किए गए।

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