मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व 

सूर्य देवता के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाए जाने वाला मकर संक्रांति पर्व भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। देश के हर हिस्से में मनाए जाने के कारण मकर संक्रांति को सामाजिक समरसता तथा एकता का प्रतीक भी माना जाता है।

मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व 

हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का कई कारणों से विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान आशुतोष ने श्री विष्णु को आत्मज्ञान दिया था। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन सूर्य जब उत्तरायण होते हैं तब देवताओं का दिन शुरू होता है उससे पहले रात रहती है। साथ ही भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही अपनी देह त्यागी थी। साथ ही मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे चलते हुए सागर में जाकर मिल गयी थीं। इसलिए इस दिन तीर्थ स्थलों पर स्नान का खास महत्व है। इन्हीं कारणों से हिन्दू धर्म में इस दिन गंगा स्नान या पवित्र नदियों में स्नान तथा दान का खास महत्व है।

मकर संक्रांति पर इन कार्यों से होगा लाभ 

मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी में स्नान का खास महत्व है। लोग इस दिन गंगा नदी या अन्य पवित्र नदियों में स्नान अवश्य करते हैं। लेकिन अगर आप नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो गंगा जल को घर में नहाने के पानी में मिला लें और उससे स्नान करें इससे आपको लाभ मिलेगा। स्नान करने के पश्चात पवित्र मन से भगवान सूर्य को जल अर्पित करें इससे सूर्य देव आपको आर्शीवाद देंगे। इसके बाद अपने घर का मंदिर साफ कर शिव जी, विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की पूजा करे। अपनी शक्ति अनुसार गरीबों को दान दें। दान में तिल और गुड़ से बने सामान, कपड़े और अन्न जरूरतमंद लोगों को दे सकते हैं। मकर संक्रांति के दिन झाड़ू खरीदें इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है। घर के बड़े लोगों का आर्शीवाद लें। तिजोरी में रखें आभूषणों को बाहर निकाल गंगा जल से धोएं और उन पर हल्दी लगाकर रखें। इसके अलावा घर में खिचड़ी बनाएं और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इन कार्यों से आपके जीवन में सुख तथा समृद्धि आएगी।

इन कामों से करें परहेज 

मकर संक्रांति का दिन बहुत खास होता है इसलिए किसी प्रकार के अनुचित कार्य आपके भविष्य में आने वाली सुख-समृद्धि पर प्रभाव डाल सकते हैं। इस दिन आपने तन को स्वच्छ रखने के साथ मन को साफ रखें। किसी के प्रति भेदभाव न रखें और किसी का बुरा न करने का संकल्प करें। इसके अलावा फूलों तथा पत्तों को नुकसान न पहुंचाएं। तुलसी के पत्तों को बिल्कुल न तोड़ें। घर के बुजुर्ग लोगों का अपमान न करें इससे सूर्य तथा शनि देव नाराज हो सकते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन काले कपड़े न पहनें। घर में तामसिक भोजन न बनाएं और खाने में लहसुन, प्याज या मांसाहार का प्रयोग न करें। यदि शराब पीते हों तो मकर संक्रांति के दिन इससे परहेज करें। किसी गरीब के मन को दुखी न करें तथा उन्हें बासी भोजन न खिलाएं।

अलग-अलग नामों से भी मनायी जाती है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति को हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा में माघी, असम में भोगाली बिहु, कर्नाटक में मकर संक्रमण, पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में ताइ पोंगल, कश्मीर में शिशुर सेंक्रात, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में खिचड़ी के नाम से मनाया जाता है।

भारत से बाहर भी धूमधाम से मनायी जाती है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति के साथ एक रोचक बात यह है कि इसे न केवल भारत में धूमधाम से मनाया जाता है बल्कि विदेशों में भी इसकी झलक दिखाई देती है। बांग्लादेश में पौष संक्रांति, नेपाल में माघी संक्रांति, कम्बोडिया में मोहा संगक्रान, म्यांमार में थिंयान तथा श्रीलंका में पोंगल के नाम से मनाया जाता है।

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