भारत के प्रसिद्ध शहरों के यह हैं प्राचीन नाम, जानिए इनके बारे में

वाराणसी जिसे आज के समय में सिटी ऑफ लाइट्स भी कहा जाता है, इसका प्राचीन नाम बनारस था। वाराणसी दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे शहरों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि इसका इतिहास 3000 साल से भी पुराना है।

भारत एक समृद्ध इतिहास और विरासत वाला देश है। यह दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है, और इसके पूरे इतिहास में कई राजवंशों और राज्यों द्वारा शासन किया गया है। खुद में एक समृद्ध इतिहास को समेटे हुए इन शहरों में समय के साथ काफी बदलाव आया। यहां तक कि इनके नाम भी बदल गए। तो चलिए आज हम आपको भारत के कुछ प्रसिद्ध शहरों के प्राचीन नामों के बारे में बता रहे हैं−

ऋषि-मुनियों और अवतारों की भूमि ‘भारत’ एक रहस्यमय देश है। धरती के 70.8% प्रतिशत भाग पर समुद्र है जिसमें से 14% भाग पर बसा है विराट हिन्द महासागर। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है। यहां देखने लायक एक और जहां बर्फ है तो दूसरी ओर समुद्र, एक ओर जहां जंगल है तो दूसरी ओर रेगिस्तान। कहने का मतलब यहां सब कुछ है। चारों धाम की यात्रा में सभी तरह के नजारों के दर्शन हो जाते हैं, लेकिन हम यहां आपके लिए लाए हैं पर्यटन और मौज-मस्ती से भरपूर 10 ऐसे स्थान, जहां जाना जरूरी है।

दुनिया का सबसे खूबसूरत देश है भारत। भारत को प्रकृति ने एक ओर जहां अनुपम और भरपूर सुंदरता से सजाया है तो दूसरी ओर अध्यात्म की गंगा भी बहाई है। भारत में एक ओर हिमालय है तो तीन ओर समुद्र, एक ओर अथाह रेगिस्तान है तो दूसरी ओर भयानक जंगल। इस सबके अलावा हरे-भरे घास के मैदान और दूसरी ओर विशालकाय पथरीली जमीन है। कहना चाहिए कि भारत में सब कुछ है। इस सब कुछ में से ही हम 10 ऐसे स्थानों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जहां जाकर आप खुद को रोमांचित अनुभव करेंगे।

दुनिया का सबसे खूबसूरत देश है भारत। भारत को प्रकृति ने एक ओर जहां अनुपम और भरपूर सुंदरता से सजाया है तो दूसरी ओर अध्यात्म की गंगा भी बहाई है। भारत में एक ओर हिमालय है तो तीन ओर समुद्र, एक ओर अथाह रेगिस्तान है तो दूसरी ओर भयानक जंगल। इस सबके अलावा हरे-भरे घास के मैदान और दूसरी ओर विशालकाय पथरीली जमीन है। कहना चाहिए कि भारत में सब कुछ है। इस सब कुछ में से ही हम 10 ऐसे स्थानों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जहां जाकर आप खुद को रोमांचित अनुभव करेंगे।

कश्मीर का श्रीनगर : श्रीनगर के बहाने आप भारत के सबसे खूबसूरत राज्य जम्मू और कश्मीर में घूम सकते हैं। यहां जहां अमरनाथ, वैष्णोदेवी की गुफा है तो दूसरी ओर बर्फ से ढंगे खूबसूरत पहाड़, झील और लंबे-लंबे देवतार के वृक्ष। जम्मू-कश्मीर में जाएं तो जम्मू और श्रीनगर जरूर जाएं।

कश्मीर घाटी में बसा श्रीनगर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और खासकर हनीमून के लिए तो ये हमेशा से आइडियल डेस्टिनेशन रहा है। 1700 मीटर ऊंचाई पर बसा ये शहर विशेष तौर पर झीलों और हाउस बोट के लिए जाना जाता है। कमल के फूलों से सुसज्जित डल झील पर कई खूबसूरत नावों पर तैरते घर हैं जिन्हें हाउस बोट कहा जाता है।> > अगर आपको भीड़-भाड़ से दूर एकदम शांत वातावरण में किसी हाउस बोट में रहने की इच्छा है तो आप नागिन लेक या झेलम नदी पर खडे हाउस बोट में ठहर सकते हैं। नागिन झील भी कश्मीर की सुंदर और छोटी-सी झील है। आमतौर पर यहां विदेशी सैलानी ही ठहरना पसंद करते हैं।
खूबसूरत झील के बाद बात आती है आकर्षक बाग-बगीचों की। यहां मौजूद मुगल गार्डन इतने बेहतरीन और सुनियोजित ढंग से तैयार किया गया है कि मुगलों का उद्यान-प्रेम इनकी खूबसूरती के रूप में यहां आज भी झलकता है। इसके अलावा शालीमार बाग, निशात बाग जैसे कई महत्वपूर्ण उद्यानों को देखे बिना श्रीनगर का सफर अधूरा-सा लगता है। इन उद्यानों में चिनार के पेड़ों के अलावा और भी छायादार वृक्ष हैं। रंग-बिरंगे फूलों की तो इनमें भरमार रहती है। इन उद्यानों के बीच बनाए गए झरनों से बहता पानी भी बेहद आकर्षक लगता है।राजस्थान का रेगिस्तान : राजस्थान में रेगिस्तान के अलावा कई ऐतिहासिक किलें और झीलें देखने लायक हैं। राजस्थान का रेगिस्तान अपने आप में एक रहस्य है। राजस्थान के बीच में से ही सरस्वती नदी बहती थी और यहां पर ही दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता रहती थी। आज भी सरस्वती की सभ्यता खोजी जाना बाकी है। कहा जाता है कि सरस्वती नदी के तट पर ही बैठकर ऋषियों ने वेद और स्मृति ग्रंथ लिखे थे

जैसलमेर और बाड़मेर : अगर आप रेगिस्तान ही देखना चाहते हैं तो जरूरी है जैसलमेर और बाड़मेर का दौरा करना। बाड़मेर राजस्थान में स्थित एक छोटा किंतु रंगों से भरपूर शहर है, लेकिन इसको देखना राजस्थान को देखना है। दूसरी ओर अनुपम वास्तुशिल्प, मधुर लोक संगीत, विपुल सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को अपने में संजोए हुए जैसलमेर स्वर्ण नगरी के रूप में विख्यात है। जैसलमेर के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में सर्वप्रमुख यहां का किला है। जैसलमेर शहर के निकट एक पहाड़ी पर बने हुए इस दुर्ग में राजमहल, कई प्राचीन जैन मंदिर और ज्ञान भंडार नामक एक पुस्तकालय है जिसमें प्राचीन संस्कृत तथा प्राकृत पांडुलिपियां रखी हुई हैं।

गुजरात का द्वारिका नगर : मथुरा से निकलकर भगवान कृष्ण ने द्वारिका क्षेत्र में ही पहले से स्थापित खंडहर हो चुके नगर क्षेत्र में एक नए नगर की स्थापना की थी। प्राचीन इतिहास की खोज करने वाले इतिहासकारों के अनुसार द्वारिका विश्‍व का सबसे रहस्यमय शहर है। इस शहर पर अभी भी शोध जारी है।

कई द्वारों का शहर होने के कारण ‘द्वारिका’ इसका नाम पड़ा। इस शहर के चारों ओर बहुत ही लंबी दीवार थी जिसमें कई द्वार थे। वह दीवार आज भी समुद्र के तल में स्थित है। भारत के सबसे प्राचीन नगरों में से एक है द्वारिका। ये 7 नगर हैं- द्वारिका, मथुरा, काशी, हरिद्वार, अवंतिका, कांची और अयोध्या। द्वारिका को द्वारावती, कुशस्थली, आनर्तक, ओखा-मंडल, गोमती द्वारिका, चक्रतीर्थ, अंतरद्वीप, वारिदुर्ग, उदधिमध्य स्थान भी कहा जाता है। > गुजरात राज्य के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे स्थित 4 धामों में से 1 धाम और 7 पवित्र पुरियों में से 1 पुरी है द्वारिका। द्वारिका 2 हैं- गोमती द्वारिका, बेट द्वारिका। गोमती द्वारिका धाम है, बेट द्वारिका पुरी है। बेट द्वारिका के लिए समुद्र मार्ग से जाना पड़ता है।

केरल : केरल को कुदरत ने बड़ी खूबसूरती से संवारा है इसलिए हनीमून के लिए केरल सबसे उपयुक्त जगह है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़, शानदार समुद्री किनारा, नारियल और खजूर के पेड़ों के झुरमुट के बीच में से नाव पर सवारी, चारों ओर हरियाली और बेहद खूबसूरत नजारे, ये सब हैं केरल की खूबसूरती की असली पहचान। इन रुमानी नजारों में प्यारभरे दिलों की धड़कनें बढ़ना स्वाभाविक है।

अगर आपको समुद्री किनारों से खास लगाव है तो यहां मौजूद चुआरा बीच, कोवलम बीच, मरुदेश्वर बीच, बेकल बीच, वर्कला बीच और शांघमुघम बीच आपके लिए सही रहेंगे। अगर आप किसी हिल स्टेशन का मजा लेना चाहते हैं तो केरल में मुन्नार, पेरीमेड, इड्डुकी, लक्कडी, देवीकुलम जैसे खूबसूरत पहाड़ी इलाकों में से आप किसी का भी चुनाव कर सकते हैं। खासकर मुन्नार तो देश ही नहीं, विदेशी सैलानियों के बीच भी काफी मशहूर है।

अंदमान-निकोबार : अगर आपको पानी से खास लगाव है तो अंडमान-निकोबार आइलैंड आपके लिए सही रहेगा। बंगाल की खाड़ी में स्थित और हिन्द महासागर की जल सीमा से सटा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह वास्तव में 300 से अधिक खूबसूरत द्वीपों और टापुओं का बड़ा समूह है, जहां पन्ना और मूंगे की चट्टानें भी मौजूद हैं। सफेद बालू वाले सुंदर समुद्र तट, जहां पानी के किनारे कतार में लंबे-लंबे नारियल के पेड़ काफी आकर्षक नजर आते हैं।

कोर्बिन्स कोव बीच, चिराया टापू, वाइपर द्वीप, रॉस आईलैंड, करमतांग बीच, रेडस्किन आईलैंड नील आईलैंड, हैवलॉक आईलैंड, हरमिंदर बे तट, चि‍ड़िया टापू (बर्ड वॉचिंग) आदि सैलानियों के विशेष आकर्षण का केंद्र माने जाते हैं। लोगों की भीड़ से दूर विशाल समुद्र का साफ पानी आपको यहां अठखेलियां करने के लिए मजबूर कर देगा। आप चाहें तो यहां सन बाथ, वाटर स्पोर्ट्स और सी-फूड का भी मजा ले सकते हैं।

कन्याकुमारी : कन्याकुमारी हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थस्थल है। कन्याकुमारी तमिलनाडु राज्य का एक शहर है। कन्याकुमारी दक्षिण भारत के महान शासकों चोल, चेर, पांड्य के अधीन रहा है। यह मध्यकाल में विजयानगरम् साम्राज्य का भी हिस्सा रहा है।

पौराणिक महत्व : कहा जाता है कि भगवान शिव ने असुर वाणासुर को वरदान दिया था कि कुंवारी कन्या के अलावा किसी के हाथों उसका वध नहीं होगा। प्राचीनकाल में भारत पर शासन करने वाले राजा भरत को 8 पुत्री और 1 पुत्र था। भरत ने अपने साम्राज्य को 9 बराबर हिस्सों में बांटकर अपनी संतानों को दे दिया। दक्षिण का हिस्सा उनकी पुत्री कुमारी को मिला। कुमारी शिव की भक्त थीं और भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं। विवाह की तैयारियां होने लगीं लेकिन नारद मुनि चाहते थे कि वाणासुर का कुमारी के हाथों वध हो जाए। इस कारण शिव और देवी कुमारी का विवाह नहीं हो पाया। > कुमारी को शक्ति देवी का अवतार माना जाने लगा और वाणासुर  के वध के बाद कुमारी की याद में ही दक्षिण भारत के इस स्थान को ‘कन्याकुमारी’ कहा जाने लगा। यहां के समुद्री तट पर ही कुमारी देवी का मंदिर है, जहां देवी पार्वती के कन्या रूप को पूजा जाता है। मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को कमर से ऊपर के वस्त्र उतारने पड़ते हैं।> प्रचलित कथा के अनुसार देवी का विवाह संपन्न न हो पाने के कारण बच गए दाल-चावल बाद में कंकर बन गए। आश्चर्यजनक रूप से कन्याकुमारी के समुद्र तट की रेत में दाल और चावल के आकार और रंग-रूप के कंकर बड़ी मात्रा में देखे जा सकते हैं।

सूर्योदय और सूर्यास्त : कन्याकुमारी अपने सूर्योदय के दृश्य के लिए काफी प्रसिद्ध है। सुबह हर होटल की छत पर पर्यटकों की भारी भीड़ सूरज की अगवानी के लिए जमा हो जाती है। शाम को सागर में डूबते सूरज को देखना भी यादगार होता है। उत्तर की ओर करीब 2-3 किलोमीटर दूर एक सनसेट प्वॉइंट भी है।

दार्जिलिंग : ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ के नाम से मशहूर दार्जिलिंग हमेशा से एक बेहतरीन हनीमून डेस्टिनेशन रहा है। कभी सिक्किम का हिस्सा रहे इस हिल स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत है यहां के चाय बागान। दूर-दूर तक फैले हरी चाय के खेत मानो धरती पर हरी चादर बिछी हो। एक समय दार्जिलिंग अपने मसालों के लिए मशहूर था लेकिन अब चाय के लिए ही ये विश्‍वस्‍तर पर जाना जाता है। यहां स्थित प्रत्‍येक चाय उद्यान का अपना-अपना इतिहास और अपनी खासियत है।

यहां के खूबसूरत और हरे-भरे चाय के बागानों से दुनियाभर में चाय निर्यात की जाती है लेकिन पश्चिम बंगाल के इस शानदार हिल स्टेशन की खूबसूरती सिर्फ इसके चाय बागान नहीं हैं बल्कि यहां की वादियां भी बेहद मनोहारी हैं। बर्फ से ढंके सुंदर पहाड़, देवदार के जंगल, प्राकृतिक सुंदरता, कलकल करते झरने सबका मन मोह लेते हैं। अपनी इसी खूबसूरती के कारण ही इसे ‘पहाड़ों की रानी’ कहा गया है और इसकी गिनती दुनियाभर के मशहूर और खूबसूरत हिल स्टेशनों में की जाती है। > दार्जिलिंग की सैर शुरू होती है मशहूर टॉय ट्रेन से, जो पहाड़ियों और खूबसूरत वादियों के बीच से होते हुए गुजरती है। इसकी यात्रा के दौरान चाय के बागान, देवदार के जंगल, तीस्ता और रंगीत नदियों के संगम के खूबसूरत नजारे सैलानियों का मन मोह लेते हैं। बतसिया लूप से गुजरते समय ट्रेन यहां वृत्ताकार घूमती है और यात्रियों को 180 डिग्री के विस्तार में पहाड़ियां नजर आती हैं।> दार्जिलिंग की एक ओर मशहूर जगह है टाइगर हिल, जो शहर से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से सूर्योदय का अद्भुत नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। यही वजह है कि कंचनजंगा की पहाड़ियों के पीछे से सूर्योदय का सतरंगी नजारा देखने के लिए रोजाना देश-विदेश से आए पर्यटक यहां जुटते हैं। इतना ही नहीं, मौसम साफ रहने पर यहां से विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट भी दिखाई देती है।

दार्जिलिंग में संजय गांधी जैविक उद्यान भी है, जहां रेड पांडा और ब्लैक बीयर समेत कई दुर्लभ प्रजाति के जानवर, पशु-पक्षी देखे जा सकते हैं। पर्यटक यहां साइबेरियन बाघ और तिब्‍‍बतियन भेड़िए को देखने का मजा भी ले सकते हैं। दार्जिलिंग में रंगीन वैली पैसेंजर रोपवे भी है, जो देश का पहला यात्री रोपवे है।

अरुणाचल : पूर्वोत्तर में अरुणाचल का सफर करना बहुत ही सुंदर, रोमांच और अद्भुत अनुभवों से भरा रहेगा। असम, सिक्किम, अरुणाचल, नगालैंड, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर में घूमना बहुत ही अद्भुत है। भारत के ये पूर्वोत्तर राज्य अपने आप में प्राकृतिक खूबसूरती को समेटे हुए हैं। यहां के ऊंचे ऊंचे पहाड़ देखने लायक हैं। पहाड़ों की सुंदरता को देखना है तो पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा जरूर करना चाहिए।पूर्वोत्तर के ये राज्य मौसम, मिजाज और संस्कृति एक अलग ही नजारा पेश करते हैं। 7 राज्यों के इस हरे-भरे व खूबसूरत पूर्वोत्तर के सफर पर जरूर जाएं। पूर्वोत्तर के राज्यों में पर्यटन के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि एक बार टूर पर निकलकर पूरे पूर्वोत्तर की सैर की जा सकती है।

असम में आप चाय बागानों, फूल, वनस्पति, दुर्लभ नस्ल के गैंडों और यहां मनाए जाने वाले पर्वों का आनंद ले सकते हैं। असम में देखने लायक बहुत कुछ है। असम के कांजीरंगा नेशनल पार्क में घूमकर आपको अद्भुत अनुभव होगा। इसके अलावा असम के दर्शनीय स्थलों में एक है नीलांचल पर्वत पर स्थित कामाख्या देवी का मंदिर और ब्रह्मपुत्र नदी के पीकॉक टापू पर स्थित प्राचीन उमानंद शिव मंदिर।

अरुणाचल की ऊंची-ऊंची चोटियों से नीचे गिरते झरने दुनिया के सबसे खूबसूरत झरने हैं। विशेषकर गोरिचन और कांगटो की चोटियों को देखना गजब का अनुभव और अहसास देता है। बल खाती सर्पीली पहाड़ी नदी कामेंग में एडवेंचर टूरिज्म के शौकीनों के लिए एक आदर्श स्थान साबित हो सकता है।

गया और बोधगया : बिहार के गया जिले के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल व धर्मनगरी बोधगया में जैन, बौद्ध और हिन्दू- तीनों ही धर्मों के लोग एकजुट होते हैं। बिहार में ही राजगीर है।

गया के तट पर जहां एक और हिन्दू अपने पितरों को पिंडदान देने के लिए एकत्रित होते हैं, वहीं वहां से कुछ किलोमीटर दूर एक स्थान पर भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था जिसे आज ‘बोधगया’ कहा जाता है। यहां का महाबोधि मंदिर विश्वप्रसिद्ध है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा तिब्बत, नेपाल, चीन, जापान, म्यांमार, कनाडा, अमेरिका सहित कई देशों से करीब 2 लाख बौद्ध धर्मावलंबी कालचक्र पूजा में आहूति देने के लिए ज्ञान की इस नगरी में उपस्थित होते हैं।  गया या बोधगया स्थान का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि यह देश की सबसे प्राचीन नगरी होने के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखती है। इसके आसपास के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्र देखने लायक हैं। यहां पर ही प्राचीन भारत के बीज बोए गए थे। राजगीर और गया ऐसे स्थान हैं, जो कई बातों के लिए महत्व रखते हैं। दर्शनीय और आध्यात्मिक महत्व के अलावा यह स्थान प्राकृतिक छटा से पटा पड़ा है।

अमरकंटक : भारत के पर्यटन स्थलों में अमरकंटक प्रसिद्ध तीर्थ और नयनाभिराम पर्यटन स्थल है। विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के बीच 1,065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह हरा-भरा होने के साथ-साथ अपने में कई रहस्य समेटे हुए हैं। आश्चर्य नहीं कि यहां के बंदर भी आपको ध्यान करते हुए मिल जाएं।
भारत की प्रमुख 7 नदियों में से अनुपम नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है और यह मध्यप्रदेश के शहडोल जिले की पुष्पराजगढ़ तहसील के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित अमरकंटक पवित्र स्थलों में गिना जाता है। यहां एक प्राचीन कमंडल है, जो हमेशा पानी से भरा रहता है।

पटना−पाटलिपुत्र

तीन सहस्राब्दियों तक फैले एक इतिहास के साथ पटना भारत का एक बेहद प्रसिद्ध शहर है, जिसे पहले पाटलीपुत्र के नाम से जाना जाता था। पटना मौर्य के शक्तिशाली साम्राज्य का केंद्र, नालंदा और विक्रमशिला के प्राचीन विश्वविद्यालयों के साथ प्राचीन काल में ज्ञान का केंद्र था। यह उस युग के कुछ महान व्यक्ति जैसे भारत की गणितीय प्रतिभा आर्यभट्ट और चाणक्य यहीं से संबंधित थे। पड्रे की हवेली, गोलघर और पटना संग्रहालय पटना के शानदार इतिहास को दर्शाते हैं।

वाराणसी−बनारस

वाराणसी जिसे आज के समय में सिटी ऑफ लाइट्स भी कहा जाता है, इसका प्राचीन नाम बनारस था। वाराणसी दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे शहरों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि इसका इतिहास 3000 साल से भी पुराना है। यहां का आदरणीय विश्वनाथ और संकट मोचन मंदिर, दुर्गा मंदिर अपने बंदरों के झुंड के लिए प्रसिद्ध है, औरंगज़ेब की महान मस्जिद, और बनारस विश्वविद्यालय वाराणसी के असंख्य खजानों में से हैं। मार्क ट्वेन की ये कुछ पंक्तियाँ वाराणसी के समृद्ध इतिहास की ओर इशारा करती हैं, उन्होंने लिखा है− “बनारस इतिहास से भी पुराना है, परंपरा से भी पुराना है, किवदंती से भी पुराना है और यह जितना पुराना दिखता है उतना ही पुराना है।”

दिल्ली−इन्द्रप्रस्थ

दिल्ली, भारत की राजधानी की एक मजबूत ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। यह भारतीय इतिहास के कुछ सबसे शक्तिशाली सम्राटों द्वारा शासित था। शहर का इतिहास महाकाव्य महाभारत जितना पुराना है। यह नगर इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था, जहाँ पांडव निवास करते थे। कुछ ही समय में आठ और शहर इंद्रप्रस्थ से सटे हुए आ गए, जिसमें लाल कोट, सिरी, दीनपनाह, क्विला राय पिथौरा, फिरोजाबाद, जहाँपना, तुगलकाबाद और शाहजहानाबाद शामिल थे। दिल्ली पांच सदियों से राजनीतिक उथल−पुथल का गवाह रही है। यह मुगलों द्वारा खिलजी और तुगलक के उत्तराधिकार में शासन किया गया था। हालांकि बाद में देश की राजधानी का नाम दिल्ली कैसे पड़ा, इसके बारे में एक मत नहीं है। माना गया है कि यह एक प्राचीन राजा “ढिल्लु” से सम्बन्धित है। कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि यह देहलीज़ का एक विकृत रूप है, जिसका हिन्दुस्तानी में अर्थ होता है ‘चौखट’, जो कि इस नगर के सम्भवतः सिन्धु−गंगा समभूमि के प्रवेश−द्वार होने का सूचक है।

अयोध्या

रामलला की जन्मस्थली अयोध्या सबसे प्राचीन शहरों में से एक है. इसका अन्य नाम साकेत भी है. अयोध्या शहर उत्तर प्रदेश में सरयु तट बसा हुआ है. यह भारत में हिंदुओं के सात सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है. यहां का राम मंदिर विश्व के कोनें- कोनें में मौजूद रामभक्तों के लिए आस्था का केंद्र है.

मथुरा

मथुरा भी भारत के सात पवित्र शहरो में से एक है. ये शहर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर वृंदावन और गोवर्धन के पास बसा हुआ है. ये शहर भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है. मथुरा और इसके आसपास के गांवों से बहुत सारी ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं. ये शहर धार्मिक मान्यताओं  के लिए विश्व विख्यात है.

वाराणसी

वाराणसी (Varanasi) का पुराना नाम काशी है. कशी की धरती कशी विश्वनाथ और मां गंगा की आरती के लिए मशहूर है. इसे भारत की आध्यात्मिक राजधानी भी कहा जाता है. इसके अलावा यहां के गंगा घाट सुकून और शांति के लिए विख्यात हैं. ये शहर भी भारत के सबसे पुराने और पवित्र शहरों में से एक है. ये शहर भी सप्तपुरी में शामिल है.

द्वारका

कृष्ण की नगरी द्वारका भी भारत के सबसे पुराने शहरों में से एक है. यह पवित्र शहर गुजरात के जामनगर में है. पवित्र द्वारका धाम शहर चार धामों में एक है. गौरतलब है कि चार धामों में द्वारका के अलावा बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम शामिल है. ये शहर भी मोक्ष प्राप्ति के तीर्थदर्शन यानी सप्तपुरी में शामिल है.

हरिद्वार

हरिद्वार  का नाम सुनते ही मन भक्तिमय हो जाता है. ये भी हिंदुओं के सात पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है. हरिद्वार  से कई विशेषताएं जुड़ी है. यहां हर चार साल पर कुंभ लगता है. गौरतलब है कि हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है. और इस बार भी यहां कुंभ मेले का आयोजन हो रहा है. इसके अलावा यहां स्थित मनसा देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर, माया देवी मंदिर और भारत माता मंदिर प्रसिद्ध हैं.

उज्जैन

इस शहर  को उज्जयिनी और अवंतिका के नाम से भी जाना जाता है. यह शहर क्षिप्रा नदी के तट पर बसा हुआ एक छोटा और पवित्र शहर है. यहां भी हर चार साल पर कुंभ मेले का आयोजन होता है. इसे महाकाल की नगरी भी कहते हैं. यहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है जो कि शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. कहते हैं कि भगवान शिव उज्जैन नगरी के राजा हैं. ये शहर भी सप्तपुरी में शामिल है.

कांची

कांची यानी कांचीपुरम तमिलनाडु में वेगवथी नदी के किनारे बसा हुआ पवित्र स्थल है. यह शहर एक पवित्र तीर्थस्थल और भारत के सात पवित्र धर्म-स्थलों में से एक है. इस शहर से जुड़ी मान्यता है कि ये शिवजी और वैष्णव अनुयायियों के लिए प्रसिद्ध है. यहां कई सारे प्रसिद्ध मंदिर जैसे- कामाक्षी अम्मान मंदिर, कौलाशनाथर मंदिर, एकम्बरेश्वर मंदिर और वैकुण्ठ पेरूमल मंदिर हैं. इसके कारण यहां सालों भर भक्तों का तांता लगा रहता है.

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