चीनी कंपनियों को व्यापार का बुलावा क्यों

मुंबई : भारत और चीन संबंधों को शिवसेना ने मुखपत्र सामना  के जरिये निशाना साधा है। सामना ने लिखा है कि लद्दाख सीमा पर हिंदुस्थान-चीन के बीच का तनाव पिछले सप्ताह समाप्त हो गया। अब हिंदुस्तान-चीन के व्यापारिक संबंधों के बीच के तनाव के भी कम होने के संकेत हैं। चीन की लगभग 45 कंपनियों को हिंदुस्थान में कारोबार शुरू करने की छूट दिए जाने की संभावना है। संक्षेप में कहें तो कोरोना के कहर के बाद चीनी कंपनियों, उनके हिंदुस्तान में कारोबार और निवेश आदि के संबंध में मोदी सरकार द्वारा ली गई सख्त भूमिका शिथिल होगी, ऐसा प्रतीत हो रहा है।

धोखेबाज़ है चीन
सामना  ने लिखा है कि चीनी सेना द्वारा हिंदुस्थान में की गई घुसपैठ, उसकी वजह से गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच हुआ रक्तरंजित संघर्ष, पीछे हटने को लेकर दोनों देशों की सख्त भूमिका, इस परिप्रेक्ष्य में पिछले सप्ताह चीन और हिंदुस्थान के बीच ‘सामंजस्य’ करार होता है, दोनों सेनाएं पीछे हटती हैं, सीमा पर तनाव कम होता है और यहां हिंदुस्थान-चीन व्यापार में निर्माण हुई गुत्थी के सुलझने की खबरें प्रसारित होती हैं। सरकार भले ही हाथ झटक ले परंतु सीमा पर चीन दो कदम पीछे हटा और यहां हिंदुस्थान से उद्योग-व्यापार में ‘चार कदम’ आगे बढ़ गया, ऐसा दृश्य स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है।

फिर से खुराफात कर कर सकता है चीन
सामना ने लिखा है कि चीन हमारा सबसे अविश्वसनीय और धोखेबाज पड़ोसी है। व्यावसायिक हित के लिए सीमा पर नरमी बरतने वाला चीन उद्देश्य पूर्ति हो जाने पर सरहद पर फिर खुराफात कर सकता है। फिर भी वहां सीमा पर चीन को पीछे धकेल दिया इसलिए ‘जीत का जश्न’ मनाना और यहां हिंदुस्थान-चीन व्यापार तनाव कैसे कम किया इसलिए पीठ थपथपाई जा रही है। कोरोना संकट के परिप्रेक्ष्य में गत वर्ष टिकटॉक सहित 51 चीनी ऐप्स पर हिंदुस्तान में प्रतिबंध लगा दिया गया था।

राष्ट्रवाद का ढोंग
सामना ने लिखा है कि ‘आत्मनिर्भर हिंदुस्थान’ का तड़का देकर ‘चीनी कम’ नीति पर राष्ट्रवाद की झालर चढ़ाई गई। मोदी सरकार द्वारा चीन के लिए उलझनें खड़ी करने का ढोल पीटा गया। फिर अब आठ महीने में ही ऐसा क्या हुआ कि 45 चीनी कंपनियों के हिंदुस्तान में व्यवसाय के लिए लाल गलीचा बिछाया जा रहा है। आत्मनिर्भर और राष्ट्रवाद का ढोल खोखला साबित हुआ तो चीन के दबाव में आप नरम हो गए? हिंदुस्थान से चीन को होनेवाला निर्यात बढ़ा और 2019 की तुलना में हिंदुस्थान-चीन व्यापार कुछ प्रमाण में कम हुआ, ये सत्य होगा फिर भी 2020 में चीन ही व्यापार में हिंदुस्थान का सबसे बड़ा भागीदार रहा ये हकीकत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Become a Journalist
Feedback/Query